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भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते की संभावना बढ़ी

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भारत और अमेरिका के बीच संभावित व्यापार समझौते पर चर्चा की है। उन्होंने बताया कि यह समझौता दोनों देशों के लिए लाभकारी और स्थायी होगा। इस वार्ता में व्यापार, दुर्लभ खनिज, ऊर्जा और रक्षा सहयोग पर भी चर्चा की गई। रूबियो ने व्यापार असंतुलन के मुद्दे को भी उठाया और कहा कि अमेरिका का उद्देश्य ऐसे समझौते करना है जो सभी पक्षों के लिए फायदेमंद हों। जानें इस महत्वपूर्ण वार्ता के बारे में और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
 

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर चर्चा

रविवार को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने जानकारी दी कि भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से प्रतीक्षित व्यापार समझौता जल्द ही अंतिम रूप ले सकता है। उन्होंने बताया कि यह समझौता दोनों देशों के लिए लाभकारी और स्थायी होगा, जिससे दोनों के पारस्परिक हितों को बढ़ावा मिलेगा।


यह टिप्पणी रूबियो ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ विस्तृत वार्ता के बाद एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में की। दोनों नेताओं ने व्यापार, दुर्लभ खनिज, ऊर्जा और रक्षा सहयोग को बढ़ाने पर चर्चा की।


रुबियो की भारत यात्रा का महत्व

अमेरिकी विदेश मंत्री की यह पहली यात्रा उस समय हो रही है जब पिछले वर्ष में व्यापार और शुल्क नीतियों को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव देखा गया था। रूबियो ने कहा, 'हमने काफी प्रगति की है और मुझे विश्वास है कि अमेरिका और भारत के बीच ऐसा व्यापार समझौता होगा जो दीर्घकालिक रहेगा और दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद होगा।'


उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की व्यापार नीति किसी विशेष देश को निशाना बनाने के लिए नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य वैश्विक व्यापार व्यवस्था में संतुलन लाना है।


व्यापार असंतुलन का मुद्दा

रुबियो ने कहा कि यह मुद्दा केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के लगभग सभी देशों के साथ व्यापार असंतुलन की समस्या सामने आई है। उन्होंने बताया कि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधिमंडल जल्द ही भारत का दौरा करेगा ताकि व्यापार समझौते को आगे बढ़ाया जा सके।


उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के व्यापार संबंधी मुद्दे यूरोपीय संघ जैसे सहयोगी देशों के साथ भी रहे हैं।


भारत की अर्थव्यवस्था और व्यापारिक संबंध

रुबियो ने कहा, 'भारत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और अमेरिका का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार भी है। ऐसे बड़े व्यापारिक संबंध वाले देश के साथ व्यापार असंतुलन को दूर करने की प्रक्रिया अधिक जटिल और व्यापक है।'


उन्होंने यह स्पष्ट किया कि अमेरिका का लक्ष्य ऐसे व्यापारिक समझौते करना है जो न केवल अमेरिका के लिए, बल्कि उसके व्यापारिक साझेदारों के लिए भी लाभकारी हों।