नाड़ी शोधन प्राणायाम: मानसिक स्वास्थ्य के लिए एक सरल उपाय
विश्व योग दिवस और नाड़ी शोधन प्राणायाम
विश्व योग दिवस, जो 21 जून को मनाया जाता है, नजदीक है। इस अवसर पर, भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने नाड़ी शोधन प्राणायाम पर जोर दिया है। यह प्राणायाम मानसिक शांति, ध्यान और शारीरिक संतुलन के लिए एक सरल और प्रभावी विधि मानी जाती है।
मंत्रालय के अनुसार, इसके नियमित अभ्यास से मानसिक समस्याओं के साथ-साथ कफ से संबंधित विकारों में भी राहत मिलती है। नाड़ी शोधन प्राणायाम, जिसे वैकल्पिक नासिका श्वास प्राणायाम भी कहा जाता है, योग की एक बुनियादी और सुरक्षित प्रक्रिया है। इसमें एक नासिका छिद्र से सांस लेना और दूसरे से छोड़ना शामिल है। इसकी तकनीक इतनी सरल है कि शुरुआती भी इसे आसानी से कर सकते हैं।
नाड़ी शोधन प्राणायाम के लाभ
आयुष मंत्रालय के 'योग फॉर हेल्दी एजिंग' पहल के तहत इस प्राणायाम को बढ़ावा दिया जा रहा है। योग विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक जीवनशैली में बढ़ते तनाव और चिंता को कम करने में नाड़ी शोधन बहुत फायदेमंद होता है। इसका नियमित अभ्यास मस्तिष्क के दोनों हिस्सों को संतुलित करता है, जिससे गहरी एकाग्रता में वृद्धि होती है।
इसके प्रमुख लाभों में मन को शांत और स्थिर करना, तनाव और चिंता के स्तर को कम करना शामिल है। इसके अभ्यास से एकाग्रता और स्मरण शक्ति में सुधार होता है और कफ विकारों जैसे सर्दी, खांसी और बलगम से राहत मिलती है। यह आंतरिक ऊर्जा के प्रवाह को भी बेहतर बनाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सुबह खाली पेट 10-15 मिनट का अभ्यास करना काफी लाभकारी होता है। धीरे-धीरे इसे 20-30 मिनट तक बढ़ाया जा सकता है। यह प्राणायाम उन लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जो ऑफिस के काम, पढ़ाई या मानसिक दबाव वाली दिनचर्या में व्यस्त रहते हैं।
योग गुरुओं के मार्गदर्शन में सही तरीके से अभ्यास करने पर इसके बेहतर परिणाम देखने को मिलते हैं।