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चुनावी ड्यूटी पर सुरक्षा बलों की यात्रा में लापरवाही का मामला

चुनावी ड्यूटी पर तैनात सुरक्षा बलों की यात्रा में गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने रेलवे बोर्ड को पत्र लिखकर बताया कि पांच राज्यों में भेजे गए जवानों को समय पर ट्रेनें और भोजन नहीं मिला। पत्र में उल्लेख किया गया है कि 230 विशेष ट्रेनों में से लगभग 200 लेट रहीं, जिससे जवानों को खाने-पीने की व्यवस्था में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इसके अलावा, कोचों की कमी और सफाई की खराब स्थिति ने भी जवानों की यात्रा को प्रभावित किया।
 

सुरक्षा बलों की यात्रा में गंभीर लापरवाही

चुनाव ड्यूटी पर तैनात सुरक्षा बलों की यात्रा व्यवस्था में गंभीर खामियां उजागर हुई हैं। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने रेलवे बोर्ड को एक पत्र भेजकर जानकारी दी है कि पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव ड्यूटी पर भेजे गए जवानों को न तो समय पर ट्रेन मिली और न ही भोजन। कई मामलों में जवानों को सुबह का नाश्ता शाम 5 बजे तक प्राप्त हुआ, क्योंकि उनकी विशेष ट्रेनें 10 से 25 घंटे की देरी से चलीं।


CRPF का विस्तृत पत्र

CRPF के इंस्पेक्टर जनरल द्वारा भेजे गए पत्र में चुनाव प्रक्रिया के अंतिम चरण के दौरान जवानों को हुई परेशानियों का उल्लेख किया गया है। यह पत्र असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में तैनात जवानों की समस्याओं को विस्तार से बताता है।


230 में से 200 ट्रेनें लेट

पत्र में बताया गया है कि चुनाव ड्यूटी के लिए चलाई गई 230 विशेष ट्रेनों में से लगभग 200 ट्रेनें समय पर नहीं पहुंचीं। इनमें से 150 से अधिक ट्रेनें 10 से 15 घंटे की देरी से चलीं, जबकि लगभग 50 ट्रेनें 20 से 25 घंटे तक लेट रहीं। इस भारी देरी ने जवानों के खाने और आराम की व्यवस्था को प्रभावित किया।


खाने-पीने की व्यवस्था में गड़बड़ी

देरी के कारण खाने-पीने की व्यवस्था पूरी तरह से गड़बड़ा गई। कई बार जवानों को दिन का पहला भोजन, यानी सुबह का नाश्ता, शाम 5 बजे के बाद मिला। IRCTC ने समय पर खाना पहुंचाने का प्रयास किया, लेकिन ट्रेनों की लगातार देरी के कारण यह व्यवस्था सही से काम नहीं कर पाई।


कोच की कमी और खराब व्यवस्था

CRPF ने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि कई ट्रेनों में पर्याप्त कोच उपलब्ध नहीं कराए गए। जहां 24 कोच की आवश्यकता थी, वहां केवल 19 से 20 कोच दिए गए, जिससे जवानों को अत्यधिक भीड़ में यात्रा करनी पड़ी। कई स्थानों पर कोचों की सफाई और रखरखाव भी संतोषजनक नहीं था, जिससे महिला जवानों सहित सभी कर्मियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।