आस्था का महाकुम्भ, अर्थ का महाकुम्भ साबित हुआ
डॉ. आशीष वशिष्ठ
महाकुम्भ नगर, 27 फरवरी (हि.स.)। महाशिवरात्रि के पवित्र स्नान के साथ ही महाकुम्भ मेले का समापन हो गया। महाकुम्भ के मेगा इवेंट ने सारे अनुमान को पीछे छोड़ते हुए जो कीर्तिमान बनाये हैं, वो लंबे समय तक याद तो किये ही जाएंगे। 13 जनवरी को पौष पूर्णिमा के स्नान से शुरू हुआ महाकुम्भ जैसे-जैसे बढ़ता गया, वैसे वैसे सारे अनुमान पीछे छूटते गए। अनुमान चाहे श्रद्धालुओं की संख्या का रहा हो या फिर इकोनोमी को मिलने वाले बूस्ट का। 45 दिन तक चले महाकुम्भ के दौरान देश के अलावा दुनिया के 100 से अधिक देशों से श्रद्धालु प्रयागराज पहुंचे। श्रद्धालुओं की भारी संख्या से ट्रांसपोर्ट सेक्टर से लेकर हॉस्पिटेलिटी, टूरिज्म तक सैकड़ों सेक्टर के बिजनेस में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई और कुल कारोबार 4 लाख करोड़ से भी ज्यादा पहुंच गया।
महाकुम्भ शुरू होने से पहले शुरुआती अनुमानों में 40 करोड़ लोगों के आने और करीब 2 लाख करोड़ रुपये के व्यापारिक लेन-देन का अनुमान लगाया गया था। व्यापारियों के संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के यूपी चैप्टर का अनुमान था कि 'महाकुम्भ 2025' के दौरान भक्तों की जरूरत वाले बुनियादी सामान से ही लगभग 17,310 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होगा। इसके अलावा मेले के दौरान किराने का सामान, खाद्य तेल, फल-सब्जियों, बिस्तर, गद्दे, चादरें और अन्य घरेलू सामान, दूध और अन्य डेयरी उत्पाद, आतिथ्य, यात्रा और नाविकों से भी खजाना भरेगा।
विश्व के इतिहास का सबसे बड़ा मानव आयोजन यूपी की इकोनोमी के लिए वरदान साबित हुआ। उप्र आदर्श व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष एवं कैट के राष्ट्रीय संगठन मंत्री संजय गुप्ता ने हिन्दुस्थान समाचार से बातचीत में कहा कि महाकुम्भ से यूपी की इकोनोमी पर सकारात्मक असर पड़ा है। कुम्भ के दौरान 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालु प्रयागराज पहुंचे। बड़ी संख्या में श्रद्धालु काशी, अयोध्या, वृंदावन और अन्य तीर्थ स्थलों में गये। अनुमान है पिछले 45 दिनों में यूपी में 3-4 लाख करोड़ के बीच कारोबार हुआ है। गुप्ता के अनुसार, होटल इंडस्ट्री के अलावा ट्रांसपोर्ट, सर्विस सेक्टर के साथ ही साथ खुदरा व्यापारियों की अच्छी कमाई हुई है। इस दौरान पेट्रोल और डीजल की भी बंपर बिक्री हुई है। वो आगे कहते हैं कि मेले में दातुन, चाय, गंगाजली बेचने वाले से लेकर नाव वालों ने खूब कमाई की है।
अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष संदीप बंसल के अनुसार, महाकुम्भ व्यापार और उद्योग दोनों सेक्टर के लिए फायदेमंद रहा। खासकर पर्यटन और सर्विस सेक्टर में बूम आया है। सरकार को भी जीएसटी के तौर राजस्व प्राप्त होगा। महाकुम्भ से पहले सरकार और उद्योग संगठनों ने कमाई के जो अनुमान लगाये थे, वो सब पीछे छूट गये हैं। अनुमानों से बढ़कर बंपर कमाई हुई है।
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी अनिल अग्रवाल के अनुसार, प्रयागराज के अलावा 150-200 किमी के दायरे में स्थित अन्य शहरों और गांवों में भी महाकुम्भ के कारण बड़ा कारोबार हुआ और खूब पैसा बरसा। इसके अलावा अयोध्या में श्री राम मंदिर, वाराणसी में भगवान भोलेनाथ तथा आसपास के शहरों में भी लोग बड़ी संख्या में अन्य देवी देवताओं के दर्शन करने पहुंचे और इन शहरों को भी खूब कमाने का मौका मिला।'
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, कई व्यावसायिक क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर आर्थिक गतिविधियां देखी गईं, जिनमें आतिथ्य और आवास, खाद्य और पेय क्षेत्र, परिवहन और लॉजिस्टिक्स, धार्मिक पोशाक, पूजा और हस्तशिल्प, कपड़ा और परिधान और दूसरे उपभोक्ता सामान शामिल हैं। महाकुम्भ के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार को 25,000 से 30,000 करोड़ रुपये की राजस्व की आय हुई। जाहिर है आस्था का महाकुंभ अर्थ का भी महाकुम्भ साबित हुआ है।
आयोजन पर 15 हजार करोड़ हुए खर्च मेला के लिए सरकारी बजट 7500 करोड़ के क़रीब था। इस बजट के अलावा इन्फ्रास्ट्रक्चरल डेवलपमेंट में भी लगभग इतना ही ख़र्च आया। यानी औसतन 15,000 करोड़ का ख़र्च मेले पर आया। यूपी सरकार ने 2019 कुंभ मेले के लिए 4,200 करोड़ रुपये आवंटित किए थे, जबकि पिछली राज्य सरकार ने 2013 में महाकुंभ के आयोजन के लिए लगभग 1,300 करोड़ रुपये खर्च किए थे। राज्य सरकार के अनुसार, 14 नए फ्लाईओवर, छह अंडरपास, 200 से अधिक चौड़ी सड़कें, नए गलियारे, विस्तारित रेलवे स्टेशन और एक आधुनिक हवाई अड्डा टर्मिनल बनाने पर 7,500 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसके अलावा महाकुम्भ मेले की व्यवस्था के लिए विशेष रूप से 1,500 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए।-------------
हिन्दुस्थान समाचार / Dr. Ashish Vashisht