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एक पेड़ मां के नाम: SSB की पहल से हरे-भरे होते सीमावर्ती गांव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत, SSB जवानों ने सीमावर्ती गांवों में फलदार पौधों का वितरण किया। यह पहल न केवल पर्यावरण की सुरक्षा को बढ़ावा दे रही है, बल्कि ग्रामीणों को भी जागरूक कर रही है। SSB की 66वीं बटालियन ने इस अभियान के माध्यम से गांवों को हरा-भरा बनाने का संकल्प लिया है, जिससे आने वाले समय में ग्रामीणों को फल भी मिलेंगे। जानें इस पहल के बारे में और कैसे यह सीमावर्ती क्षेत्रों में हरियाली लाने में मदद कर रही है।
 

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में SSB का प्रयास


महराजगंज :: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आरंभ किए गए 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान को सफल बनाने के लिए भारत-नेपाल सीमा पर तैनात सशस्त्र सीमा बल (SSB) के जवान पूरी मेहनत से जुटे हुए हैं। पर्यावरण की सुरक्षा के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए एसएसबी की 66वीं बटालियन ने एक अनूठी पहल शुरू की है, जिससे सीमावर्ती गांवों का वातावरण हरा-भरा हो रहा है।


घर-घर जाकर पौधों का वितरण

5 जून को 'विश्व पर्यावरण दिवस' के अवसर पर प्रधानमंत्री के आह्वान के बाद, एसएसबी जवानों ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। जवान अब केवल अपने कैंपों तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि सीमावर्ती गांवों में घर-घर जाकर पौधे वितरित कर रहे हैं। 66वीं बटालियन के जवानों ने ग्रामीणों को व्यक्तिगत रूप से पौधे दिए और उन्हें 'एक पेड़ मां के नाम' लगाने के लिए प्रेरित किया। यह अभियान वृक्षारोपण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि जवानों द्वारा पौधों की देखभाल और संरक्षण के बारे में भी ग्रामीणों को शिक्षित किया जा रहा है।


महिला और पुरुष जवानों की सहभागिता

इस विशेष वृक्षारोपण कार्यक्रम का नेतृत्व 66वीं बटालियन के कमांडेंट जगदीश प्रसाद दवाई कर रहे हैं। उनके साथ एसएसबी की महिला और पुरुष जवानों की एक समर्पित टीम ने सीमा क्षेत्र में वृक्षारोपण किया। कमांडेंट ने बताया कि हमारा मुख्य उद्देश्य हर ग्रामीण तक पहुंचकर उन्हें पर्यावरण के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का यह आह्वान मां के प्रति सम्मान और प्रकृति के प्रति प्रेम का एक अनूठा संगम है।


फलदार पौधों का चयन

इस अभियान की एक विशेषता यह है कि इसमें खासतौर पर फलदार पौधों का वितरण किया जा रहा है। फलदार पौधे लगाने के पीछे दो मुख्य उद्देश्य हैं: पहला, इससे पर्यावरण संतुलित रहेगा और हरियाली बढ़ेगी, और दूसरा, ये पौधे भविष्य में ग्रामीणों को फल प्रदान करेंगे, जो उनकी आर्थिक और पोषण संबंधी जरूरतों में सहायक होंगे।


ग्रामीणों में भारी उत्साह

एसएसबी के इस नेक कार्य में सीमावर्ती गांवों के लोगों का भरपूर सहयोग मिल रहा है। ग्रामीण न केवल पौधे प्राप्त कर रहे हैं, बल्कि उन्हें अपने घरों के आसपास पूरी निष्ठा के साथ रोपित भी कर रहे हैं। जवानों और ग्रामीणों की इस साझा कोशिश से भारत-नेपाल सीमा का क्षेत्र आने वाले वर्षों में एक हरित पट्टी के रूप में विकसित होगा। यह पहल न केवल पर्यावरण की रक्षा करेगी, बल्कि सीमा सुरक्षा बल और आम जनता के बीच संबंधों को भी मजबूत बनाएगी।