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पश्चिम बंगाल की फलता सीट: भाजपा की बढ़त से बदलती राजनीति का संकेत

पश्चिम बंगाल की फलता विधानसभा सीट पर चल रही मतगणना में भाजपा के देवांगशू पांडा ने मजबूत बढ़त बनाई है। इस सीट का राजनीतिक महत्व बढ़ता जा रहा है, खासकर तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार के चुनावी मैदान से हटने के बाद। 2021 में तृणमूल ने यहां जीत हासिल की थी, लेकिन इस बार भाजपा की स्थिति मजबूत नजर आ रही है। जानें, फलता सीट के चुनावी परिणाम का क्या होगा असर बंगाल की राजनीति पर।
 

फलता विधानसभा सीट पर मतगणना का दौर


कोलकाता: पश्चिम बंगाल की फलता विधानसभा सीट एक बार फिर से राज्य की राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बन गई है। रविवार सुबह से यहां मतगणना का कार्य जारी है, और शुरुआती रुझानों ने राजनीतिक तापमान को और बढ़ा दिया है। भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच सीधी प्रतिस्पर्धा वाली इस सीट पर भाजपा के उम्मीदवार देवांगशू पांडा ने पहले राउंड से ही मजबूत बढ़त बना ली है। रिपोर्ट्स के अनुसार, वह शुरुआती चरण में 9,000 से अधिक वोटों से आगे चल रहे हैं। फलता सीट अब केवल एक विधानसभा सीट नहीं, बल्कि बंगाल की बदलती राजनीतिक स्थिति का प्रतीक बन चुकी है।


मतगणना की प्रक्रिया

फलता विधानसभा सीट पर वोटों की गिनती सुबह 8 बजे शुरू हुई। मतगणना केंद्र के बाहर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी न हो सके। सबसे पहले पोस्टल बैलेट की गिनती की गई, इसके बाद ईवीएम खोले गए। चुनाव आयोग ने पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। इस सीट पर कुल 21 राउंड में मतगणना होनी है। शुरुआती रुझानों के बाद भाजपा खेमे में उत्साह का माहौल है, जबकि तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों में बेचैनी बढ़ती नजर आ रही है।


दोबारा मतदान का कारण

फलता सीट पर 29 अप्रैल को दूसरे चरण के मतदान के दौरान भारी हंगामा और कई गंभीर शिकायतें सामने आई थीं। कई बूथों पर आरोप लगा कि ईवीएम मशीनों पर खुशबूदार पदार्थ और सेलोटेप चिपकाए गए थे। इसके अलावा, वेब कैमरों की फुटेज के साथ छेड़छाड़ की कोशिश की भी बात सामने आई।


इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए चुनाव आयोग ने जांच कराई। जांच में कई अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद आयोग ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए सभी 285 बूथों पर फिर से मतदान कराने का निर्णय लिया। इसके बाद 21 मई को दोबारा वोटिंग हुई।


भाजपा उम्मीदवार की स्थिति

मतगणना शुरू होने से पहले ही राजनीतिक विश्लेषक भाजपा उम्मीदवार देवांगशू पांडा को मजबूत स्थिति में मान रहे थे। इसकी सबसे बड़ी वजह तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जहांगीर खान का अचानक चुनावी मैदान से हटना माना जा रहा है। जहांगीर खान ने मतदान से ठीक दो दिन पहले चुनाव न लड़ने का निर्णय लिया था। उन्होंने इसे व्यक्तिगत निर्णय बताया, लेकिन इस कदम ने पूरे चुनावी समीकरण को बदल दिया। इसके बाद से ही भाजपा इस सीट पर अपनी जीत को लेकर काफी आश्वस्त नजर आ रही थी।


फलता सीट का राजनीतिक महत्व

फलता सीट का राजनीतिक महत्व लगातार बढ़ता जा रहा है। 2021 के विधानसभा चुनाव में यहां तृणमूल कांग्रेस के शंकर कुमार नास्कर ने भाजपा के बिधान परुई को 40,000 से अधिक वोटों से हराया था। लेकिन 2026 के चुनावों में हालात पूरी तरह बदलते नजर आ रहे हैं। इस बार यहां 88.78 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो पिछले चुनाव के मुकाबले अधिक है। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि मतदाताओं में इस चुनाव को लेकर काफी उत्साह था। राज्य में पहले ही भाजपा ऐतिहासिक बहुमत के साथ सरकार बना चुकी है, इसलिए फलता सीट का परिणाम राजनीतिक दृष्टि से और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।