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पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में पुलिस की बगावत: मौत का खौफ और वेतन में भेदभाव

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में हालात बेकाबू हो गए हैं, जहां पुलिसकर्मी मौत के डर से ड्यूटी ज्वाइन नहीं कर रहे हैं। हालिया हिंसक प्रदर्शनों में कई पुलिसकर्मियों और नागरिकों की जानें गई हैं। इसके अलावा, पुलिसकर्मियों के वेतन में भारी भेदभाव भी उनकी बगावत का एक बड़ा कारण है। जानें इस गंभीर स्थिति के पीछे की वजहें और पाकिस्तान सरकार की चुनौतियाँ।
 

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में बिगड़ते हालात

इस्लामाबाद: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर हो गई है। हिंसक प्रदर्शनों की लहर ने पीओके को झकझोर कर रख दिया है, और अब पाकिस्तानी पुलिस के जवान भी इस क्षेत्र में जाने से मना कर रहे हैं। एक गुप्त सरकारी दस्तावेज से यह खुलासा हुआ है कि पुलिसकर्मी पीओके और गिलगित-बाल्टिस्तान में तैनाती के बावजूद ड्यूटी ज्वाइन नहीं कर रहे हैं। इस स्थिति को देखते हुए सरकार ने ऐसे 'बागी' पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। हाल ही में, एक पुलिसकर्मी को ड्यूटी से अनुपस्थित रहने के कारण बर्खास्त कर दिया गया है, और अब ऐसे पुलिसवालों की एक लंबी सूची तैयार की जा रही है जिन्हें कानून के तहत निकाला जा सके।


मौत का खौफ और हिंसा का माहौल

हर पल सता रहा मौत का खौफ, अब तक कई की जा चुकी है जान

पुलिसकर्मियों का पीओके से दूर रहना उनकी जान के डर के कारण है। इस क्षेत्र में हालात बेहद खराब हैं, और नागरिक सड़कों पर उतरकर हिंसक प्रदर्शन कर रहे हैं। हाल ही में हुई झड़पों में चार पुलिसकर्मियों और सात नागरिकों की हत्या कर दी गई, जिससे सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। पिछले दो वर्षों में यह तीसरी बार है जब पीओके में इतनी गंभीर स्थिति उत्पन्न हुई है, जिससे पुलिसकर्मी वहां जाने से हिचकिचा रहे हैं।


वेतन में भेदभाव का मुद्दा

वेतन में भारी भेदभाव, कौड़ियों के भाव काम करने को मजबूर

पुलिसकर्मियों की बगावत का एक और बड़ा कारण उनके वेतन और भत्तों में भेदभाव है। पंजाब प्रांत में एक कांस्टेबल को 73,000 रुपये और सिंध में 69,000 रुपये मिलते हैं, जबकि पीओके में तैनात कांस्टेबल को केवल 15,899 रुपये दिए जाते हैं। इस भेदभाव के खिलाफ सितंबर 2025 में 11,000 से अधिक पुलिसकर्मी सड़कों पर उतर आए थे, यह कहते हुए कि उन्हें 2012 के पुराने वेतनमान के आधार पर भुगतान किया जा रहा है।


पीओके में बगावत का कारण

आखिर क्यों धधक रहा है पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर?

1947-48 में कश्मीर के जिस हिस्से पर पाकिस्तान ने अवैध कब्जा किया था, वही आज पीओके पाकिस्तान के लिए एक बड़ी समस्या बन चुका है। पाकिस्तान सरकार अब इस क्षेत्र में चुनाव कराने की योजना बना रही है, लेकिन स्थानीय जनता ने भारी बगावत कर दी है। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग यह है कि पीओके विधानसभा में शरणार्थी कश्मीरियों के लिए आरक्षित 12 सीटें तुरंत समाप्त की जाएं। यह आंदोलन अब पाकिस्तान सरकार के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन गया है।