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बकरीद पर धार्मिक बलि के नियम: राज्यों में अलग-अलग कानून

बकरीद के अवसर पर धार्मिक बलि का मुद्दा विभिन्न राज्यों में चर्चा का विषय बना हुआ है। कई राज्यों ने गाय, ऊंट और बछड़ों की बलि पर सख्त पाबंदियाँ लगाई हैं। जानें उत्तर प्रदेश, पंजाब, और महाराष्ट्र में बलि के नियम क्या हैं और अन्य राज्यों में क्या स्थिति है। इस लेख में जानवरों की सुरक्षा से जुड़े कानूनों की विस्तृत जानकारी दी गई है।
 

बकरीद के दौरान बलि का मुद्दा


नई दिल्ली: बकरीद के अवसर पर धार्मिक बलि का विषय काफी चर्चा में रहा है। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और दिल्ली सहित कई राज्यों की सरकारों ने इस पर विशेष दिशा-निर्देश और सलाह जारी की हैं। खुले में बलि देने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है और गाय, ऊंट और बछड़ों की बलि पर सख्त पाबंदी है। जानवरों की बलि से संबंधित नियम हर राज्य में भिन्न हैं.


गायों की बलि पर प्रतिबंध

कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में गायों की बलि पूरी तरह से निषिद्ध है। इनमें से कई स्थानों पर सांडों और बछड़ों की बलि भी मना है। कानूनी प्रावधानों के अनुसार, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और चंडीगढ़ में गायों की बलि पर प्रतिबंध है.


उत्तर प्रदेश का कानून

उत्तर प्रदेश का कानून इस संदर्भ में सबसे पुराना माना जाता है, जो 1955 का है। यह कानून राज्य में किसी भी व्यक्ति को गाय, सांड या बछड़े को काटने या कटवाने से रोकता है। इसके अलावा, यह कानून किसी अन्य कानून या स्थानीय रीति-रिवाज से ऊपर माना जाता है.


पंजाब और महाराष्ट्र के कानून

पंजाब में भी ऐसा ही कानून है जो गायों की बलि पर रोक लगाता है। हालांकि, कुछ मामलों में छूट दी जाती है, जैसे कि जब पशु चिकित्सक यह प्रमाणित करे कि जानवर बीमार है। महाराष्ट्र में दूसरे राज्यों से लाए गए बीफ को अपने पास रखना आपराधिक नहीं है.


अन्य राज्यों के कानून

जहां कई राज्यों में गायों और बछड़ों की बलि पर प्रतिबंध है, वहीं भैंसों की बलि की अनुमति है। इसमें बिहार, झारखंड, ओडिशा, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और गोवा शामिल हैं। इसके विपरीत, केरल, पश्चिम बंगाल, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा और सिक्किम में गायों की बलि पर पूरी तरह से रोक नहीं है। हालांकि, सभी राज्यों में जानवरों की बलि केवल लाइसेंस प्राप्त स्थानों पर ही दी जा सकती है.


ऊंटों से संबंधित नियम

राजस्थान में ऊंटों के लिए कड़े नियम हैं। राजस्थान सरकार ने ऊंट को 'राज्य पशु' घोषित किया है, जिसके कारण इसे गाय के समान संरक्षण दिया गया है। यह कानून ऊंटों की घटती संख्या को रोकने के उद्देश्य से बनाया गया था.


इसलिए, राजस्थान में ऊंटों के वध पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। कुछ साल पहले, राजस्थान के टोंक में ऊंटों की बलि देने की प्रथा पर भी रोक लगाई गई थी, जो पिछले 150 वर्षों से चली आ रही थी.