भारत ने इबोला प्रकोप के चलते यात्रा पर सलाह जारी की
भारत सरकार की यात्रा सलाह
भारत के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने रविवार को सभी नागरिकों को सलाह दी है कि वे कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान की अनावश्यक यात्रा से बचें। यह निर्देश विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा इबोला वायरस के प्रकोप को सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल (PHEIC) घोषित करने के बाद जारी किया गया है।
इबोला वायरस की स्थिति
स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि कांगो और युगांडा में इबोला के मामलों में वृद्धि के कारण, WHO ने 17 मई 2026 को इस स्थिति को सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है। इसके अतिरिक्त, अफ्रीका सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने भी कांगो और युगांडा में फैल रहे बुंडिबुग्यो स्ट्रेन को सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल का दर्जा दिया है।
यात्रियों की जांच
22 मई को WHO की आपातकालीन समिति ने कुछ महत्वपूर्ण सलाह दी है। इसमें एयरपोर्ट और सीमा जैसे प्रवेश बिंदुओं पर यात्रियों की सख्त जांच करने का निर्देश दिया गया है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई व्यक्ति ऐसे क्षेत्रों से आ रहा है जहां बुंडिबुग्यो वायरस फैला है, उसे पहचानने और इलाज करने की प्रक्रिया को तेज किया जाएगा।
बीमारी के आंकड़े
WHO के अनुसार, 21 मई तक कांगो में 746 संदिग्ध मामले और 176 मौतें दर्ज की गई हैं। युगांडा में दो मामले और कुल 10 मौतें हुई हैं। कांगो और युगांडा की सीमाओं से जुड़े देशों, जैसे दक्षिण सूडान में भी बीमारी फैलने का खतरा बना हुआ है।
इबोला वायरस का खतरा
इबोला बीमारी बुंडिबुग्यो वायरस के संक्रमण से फैलती है, जो एक गंभीर वायरल हेमरेजिक फीवर है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस वायरस से बचाव या उपचार के लिए अभी तक कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है।
सरकार के निर्देश
भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि जब तक स्थिति सामान्य नहीं होती, तब तक भारतीय नागरिकों को कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान की यात्रा नहीं करनी चाहिए। जो लोग पहले से इन देशों में हैं, उन्हें स्थानीय प्रशासन द्वारा दिए गए स्वास्थ्य नियमों का पालन करना चाहिए। सरकार ने यह भी बताया कि भारत के सभी प्रवेश बिंदुओं पर निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी बीमार व्यक्ति का समय पर पता लगाया जा सके। वर्तमान में भारत में इस वायरस का कोई मामला नहीं पाया गया है।