इजराइल में छत्रपति शिवाजी महाराज की भव्य मूर्ति की स्थापना का ऐलान
इजराइल का ऐतिहासिक निर्णय
इजराइल ने एक महत्वपूर्ण घोषणा की है, जिसके तहत वह मराठा साम्राज्य के महान नेता छत्रपति शिवाजी महाराज की एक भव्य मूर्ति अपने देश में स्थापित करेगा। यह कदम भारत और इजराइल के बीच ऐतिहासिक संबंधों को और मजबूत करेगा। छत्रपति शिवाजी महाराज ने औरंगजेब की सत्ता को चुनौती दी थी, और अब इजराइल उनके योगदान को मान्यता देने के लिए आगे बढ़ रहा है।
इजराइल का उद्देश्य अपने नागरिकों को यह बताना है कि कैसे यहूदी समुदाय ने छत्रपति शिवाजी की सेना के साथ मिलकर मुगलों के खिलाफ संघर्ष किया। मुंबई में इजराइल के काउंसिल जनरल, यानीव रेवाच ने इस योजना की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह पहल किसी अन्य देश को खुश करने के लिए नहीं, बल्कि इजराइल के लोगों को भारतीय इतिहास से अवगत कराने के लिए की जा रही है।
सांस्कृतिक बदलाव की दिशा में कदम
इजराइल छत्रपति शिवाजी पर लिखी गई किताबों का हिब्रू में अनुवाद भी करवा रहा है, ताकि यहूदियों को उनकी वीरता और शौर्य की कहानियाँ पढ़ने को मिल सकें। शिवाजी महाराज ने मुगलों को पराजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, लेकिन उनके बारे में वामपंथियों ने कम जानकारी दी है।
इतिहास में यह भी उल्लेखनीय है कि जब विश्व के अन्य हिस्सों में यहूदियों पर अत्याचार हो रहे थे, तब भारत ने उन्हें संरक्षण प्रदान किया। भारत वह देश है जहाँ यहूदियों के खिलाफ कभी भी भेदभाव नहीं किया गया। बताया जाता है कि 175 ईसा पूर्व में, बेने इजराइल समुदाय के कुछ लोग महाराष्ट्र में पहुंचे थे।
बेने इजराइल का योगदान
बेने इजराइल समुदाय, जो अपनी युद्ध कला और सैन्य कौशल के लिए जाना जाता है, ने क्षेत्रीय सेनाओं में सेवा की, जिसमें मराठा राज्य की सेनाएँ भी शामिल थीं। छत्रपति शिवाजी महाराज ने इन लोगों की सैन्य क्षमताओं को पहचाना और उन्हें अपनी सेना में शामिल किया। जब मराठा शासक मुगलों के खिलाफ संघर्ष कर रहे थे, तब यहूदी सैनिकों ने भी शिवाजी महाराज की सेना में महत्वपूर्ण योगदान दिया।