ब्रिटेन में सिख समुदाय के खिलाफ बढ़ती शत्रुता और कृपाण विवाद
ब्रिटेन में सिख समुदाय की स्थिति
ब्रिटेन में सिख समुदाय को कृपाण रखने के कारण बढ़ती शत्रुता और जांच का सामना करना पड़ रहा है। कृपाण, सिख धर्म के पांच पवित्र प्रतीकों में से एक है। यह विवाद तब और बढ़ गया जब दिसंबर 2025 में 23 वर्षीय विक्रम दिगवा ने ब्रिटिश-पोलिश किशोर हेनरी नोवाक की हत्या कर दी। मई में दिगवा को आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद यह मुद्दा और भी गरम हो गया।
ब्रिटेन में सिख नेता, राजनेता और सामुदायिक संगठन इस बात पर जोर दे रहे हैं कि जनता का गुस्सा गलत दिशा में जा रहा है और वे अपने धार्मिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। विवाद का मुख्य बिंदु कृपाण है, जो दीक्षा प्राप्त सिखों द्वारा धारण किया जाने वाला एक औपचारिक हथियार है। कुछ कार्यकर्ताओं ने नोवाक की हत्या के बाद कृपाण पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है, जबकि सिख समूहों का कहना है कि किशोर की हत्या औपचारिक कृपाण से नहीं, बल्कि एक बड़े खंजर से की गई थी।
सार्वजनिक सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता पर बहस
यह मामला धार्मिक स्वतंत्रता, सार्वजनिक सुरक्षा, चाकू से होने वाले अपराध और ब्रिटिश कानून के तहत सिखों को दी गई कानूनी छूटों पर व्यापक बहस का केंद्र बन गया है। दिगवा के दोषी ठहराए जाने के बाद, सिख संगठनों ने पूरे ब्रिटेन में समुदाय के सदस्यों के प्रति शत्रुता में वृद्धि की सूचना दी।
समुदाय के नेताओं का कहना है कि कम से कम 15 सिखों को सार्वजनिक स्थानों पर ऐसे समूहों का सामना करना पड़ा, जो उनसे यह पूछते थे कि क्या वे कृपाण लेकर चल रहे हैं। एक शिक्षक अमनदीप सिंह ने बताया कि कई सिखों से ऐसे समूहों ने संपर्क किया है, जो कृपाण के बारे में पूछकर तनाव बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि माहौल लगातार शत्रुतापूर्ण होता जा रहा है।
सिख संगठनों की प्रतिक्रिया
एसेक्स की निवासी सोफी कोरकोरन ने एक्स पर कृपाण की तस्वीर साझा करते हुए लिखा, "यह बेतुका है कि मैं कानूनी तौर पर पेपर स्प्रे नहीं रख सकती, लेकिन सिख इसे कानूनी तौर पर रख सकते हैं।" सिख संगठनों ने हत्या की निंदा की और इसे एक व्यक्ति द्वारा "पागलपन का क्षण" बताया। उन्होंने यह भी कहा कि एक व्यक्ति के कार्यों के आधार पर पूरे समुदाय को दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए।