प्रधानमंत्री मोदी की अपील पर बवाल: 82 देशों ने पहले ही उठाए कदम
प्रधानमंत्री मोदी की अपील पर प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया बयान ने पूरे देश में हलचल मचा दी है। उन्होंने भारतीय नागरिकों से एक साल तक सोना न खरीदने, ईंधन की बचत करने और संभव हो तो घर से काम करने की अपील की। यह ध्यान देने योग्य है कि इससे पहले 82 देशों ने वैश्विक ऊर्जा संकट से निपटने के लिए कठोर कदम उठाए हैं।
आपको याद होगा कि जब ईरान के लिए भारत के विभिन्न हिस्सों में मुस्लिम समुदाय ने लगभग 600 करोड़ रुपये एकत्र किए थे, तब यह पूरी तरह से उनकी स्वेच्छा पर निर्भर था। किसी भी प्रकार का दबाव नहीं था। लोगों ने अपने व्यक्तिगत गहने, सोने के हार और नकद राशि ईरान के लिए दान की। लेकिन जब पीएम मोदी ने भारतीयों से केवल इतना कहा कि वे कुछ समय के लिए सोने की खरीदारी से बचें, तो इस पर विपक्षी दलों और अन्य समूहों ने हंगामा खड़ा कर दिया।
दुनिया भर में उठाए गए कदम
यह जानकर आपको आश्चर्य होगा कि 82 से अधिक देशों ने पहले ही ऊर्जा संकट से निपटने के लिए आपातकालीन उपाय लागू कर दिए हैं। छह देशों ने स्कूलों और विश्वविद्यालयों को बंद कर दिया है या उनके खुलने के समय में पाबंदियां लगाई हैं। 18 देशों ने यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिए हैं और ईंधन की खरीद पर राशनिंग लागू की है।
इसके अलावा, 13 देशों ने वर्क फ्रॉम होम को अनिवार्य कर दिया है, जबकि तीन देशों ने खाना पकाने के तेल और एलपीजी के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है। 35 से अधिक देशों ने ऊर्जा बचाने के लिए बड़े अभियान शुरू किए हैं, जिसमें एसी को 24° से 26° पर चलाने की सलाह दी गई है। कई यूरोपीय देशों में लोगों को अपनी जीवनशैली में बदलाव लाने के लिए कहा गया है।
भारत की स्थिति
अमेरिका में महंगाई दर 3.8% तक पहुंच गई है, जो पिछले तीन वर्षों में सबसे अधिक है। 95 देशों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ा दी हैं, जिनमें कई यूरोपीय देश शामिल हैं। लेकिन भारत एकमात्र ऐसा देश है जहां अभी तक पेट्रोल और डीजल की कीमतें नहीं बढ़ी हैं।
यह सोचने वाली बात है कि 82 से अधिक देशों ने पहले ही आपातकालीन कदम उठाए हैं, जबकि भारत ने इन चुनौतियों का सामना करने में उत्कृष्टता दिखाई है। फिर भी, जब पीएम मोदी ने केवल तेल बचाने, सोना न खरीदने और विदेश यात्रा से बचने की अपील की, तो इस पर विवाद खड़ा हो गया।