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सीबीएसई परीक्षा में छात्रों की परेशानियों का बढ़ता सिलसिला

भारत के शिक्षा मंत्रालय की लापरवाही ने लाखों छात्रों को संकट में डाल दिया है। 12वीं कक्षा के परिणामों और नीट परीक्षा के रद्द होने से छात्रों और उनके अभिभावकों में चिंता बढ़ गई है। सीबीएसई की ऑनस्क्रीन मार्किंग प्रणाली ने छात्रों को कम अंक दिए हैं, जिससे उनकी भविष्य की योजनाएँ प्रभावित हो रही हैं। पुनर्मूल्यांकन के लिए छात्रों की भीड़ ने तकनीकी समस्याओं का सामना किया है। इस स्थिति में सरकार की चुप्पी और छात्रों की परेशानियाँ गंभीर चिंता का विषय हैं।
 

शिक्षा मंत्रालय की लापरवाही

भारत के शिक्षा मंत्रालय की गतिविधियाँ चिंताजनक हैं। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) और मेडिकल प्रवेश परीक्षा आयोजित करने वाली एनटीए जैसी एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। इस समय, 12वीं कक्षा के परिणाम और नीट परीक्षा के रद्द होने से लाखों छात्र और उनके अभिभावक परेशान हैं। इस स्थिति ने कई परिवारों को आर्थिक नुकसान भी पहुँचाया है। 17 से 19 वर्ष के किशोरों की मानसिक स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। लेकिन सरकार की ओर से कोई ठोस कदम उठाने का संकेत नहीं मिल रहा है। 12वीं बोर्ड परीक्षा के परिणामों और उसके बाद की घटनाओं ने छात्रों को अवसाद की ओर धकेल दिया है।


ऑनस्क्रीन मार्किंग की समस्या

इस बार 12वीं की बोर्ड परीक्षा में 17 लाख से अधिक छात्रों ने भाग लिया। सीबीएसई ने इस बार ऑनस्क्रीन मार्किंग का निर्णय लिया, जो भारत जैसे विशाल देश में व्यावहारिक नहीं था। 17 लाख छात्रों की 80 लाख उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन किया गया, लेकिन कई पन्ने ठीक से स्कैन नहीं हो पाए। इसके परिणामस्वरूप, छात्रों को अंक कम मिले। पहले, यदि छात्रों ने गणित का कोई सवाल कम स्टेप्स में हल किया और उत्तर सही था, तो उन्हें पूरे अंक मिल जाते थे। लेकिन इस बार, छात्रों को अपनी रचनात्मकता दिखाने पर अंक कटने का सामना करना पड़ा।


पुनर्मूल्यांकन के लिए छात्रों की भीड़

छात्रों ने उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करना शुरू कर दिया। पहले तीन घंटों में ही 1,26,000 से अधिक छात्रों ने आवेदन किया, जो कुल छात्रों का 7% है। यह संख्या पहले के 2-3% से काफी अधिक है। सीबीएसई ने आगे के आंकड़े साझा करना बंद कर दिया। पुनर्मूल्यांकन के लिए वेबसाइट पर छात्रों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ा।


सीबीएसई की तकनीकी समस्याएँ

पुनर्मूल्यांकन के लिए लिंक सीधे उपलब्ध नहीं था, जिससे छात्रों को सीबीएसई के एक्स हैंडल से लिंक खोलना पड़ा। रजिस्ट्रेशन के दौरान कई छात्रों को 'नॉट रजिस्टर्ड' का संदेश मिला। इसके अलावा, एक कॉपी की जांच की फीस 100 रुपये थी, लेकिन कई छात्रों को 10,000 से लेकर 3.5 लाख रुपये तक जमा करने के मैसेज मिले। सीबीएसई ने कहा कि उनकी साइट हैक हो गई है।


सरकार की चुप्पी

इस मामले में कई छात्रों ने यह भी बताया कि बहुविकल्पी सवालों में सही उत्तर होने पर भी अंक काटे गए। सरकार ने कहा है कि यदि किसी छात्र का एक भी अंक बढ़ता है, तो उनसे कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। इससे छात्रों में और भी घबराहट बढ़ गई है। प्रधानमंत्री ने 10वीं और 12वीं के छात्रों के साथ परीक्षा पर चर्चा की थी, लेकिन अब जब बच्चे इतनी बड़ी मुसीबत में हैं, तो प्रधानमंत्री की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।