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पूसीरे 2025 तक 100 फीसदी रेलवे विद्युतिकरण की ओर अग्रसर

 


-भारत में इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन के 100 वर्ष पूरे होने का जश्न

गुवाहाटी, 26 फरवरी (हि.स.)। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (पूसीरे) ने बिजलीकरण में उल्लेखनीय प्रगति की है, जिससे इसके क्षेत्राधिकार के अधीन रेल संपर्क में उल्लेखनीय वृद्धि, यात्रा समय में कमी और माल परिवहन में सुधार हुआ है। विकास की इस यात्रा में एक प्रमुख माइलस्टोन 11 अप्रैल, 2017 को हासिल हुआ था, जब ट्रेन संख्या 15708/15707 (कटिहार-अमृतसर एक्सप्रेस) कटिहार-बरौनी सेक्शन में बिजली से चलने वाली पहली यात्री ट्रेन बनी। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि पूर्वोत्तर में रेलवे नेटवर्क का विद्युतीकरण मार्च 2025 तक पूरा हो जाएगा। इस पहल से क्षेत्र में कनेक्टिविटी को बढ़ावा, परिचालन दक्षता में वृद्धि और मजबूत परिवहन को समर्थन मिलने की उम्मीद है। चुनौतीपूर्ण भौगोलिक और लॉजिस्टिक स्थितियों के बावजूद, पूसीरे ने इन बाधाओं को सफलतापूर्वक पार कर लिया है, जिससे कनेक्टिविटी, यात्रा दक्षता और माल परिवहन में पर्याप्त सुधार हुआ है। जनवरी 2025 तक, पूसीरे में 2,828 रूट किलोमीटर (आरकेएम) विद्युतीकृत हो चुका है। राजधानी मार्ग का बिजलीकरण मार्च 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य है। वहीं, पूसीरे में पूर्ण बिजलीकरण कैलेंडर वर्ष 2025 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य है।

पूसीरे के सीपीआरओ कपिंजल किशोर शर्मा ने आज एक बयान में बताया है कि कटिहार-गुवाहाटी, गुवाहाटी-लामडिंग, लामडिंग-फरकाटिंग, अगरतला-सबरूम और अगरतला-जिरिबाम जैसे प्रमुख मार्गों के बिजलीकरण ने क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत और आर्थिक विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पू. सी. रेलवे की बिजलीकरण यात्रा ने उल्लेखनीय माइलस्टोन दर्ज की है, जिसकी शुरुआत अप्रैल 2017 में हुई थी, जब कटिहार मंडल में इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन पर पहली मालगाड़ी और यात्रीवाही ट्रेनें शुरू की गई थीं। 14 अप्रैल, 2017 को कटिहार से पहली राजधानी एक्सप्रेस चली थी। अन्य ऐतिहासिक उपलब्धियों में 9 जनवरी, 2020 को न्यू जलपाईगुड़ी और कोलकाता के बीच इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन पर पहली यात्रीवाही ट्रेन, 22 अक्टूबर, 2021 को नई दिल्ली से गुवाहाटी के कामाख्या स्टेशन में ब्रह्मपुत्र मेल का ऐतिहासिक आगमन एवं पूर्ण इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन पर 2,000 किमी से अधिक की दूरी तय करना तथा 26 फरवरी, 2022 को गुवाहाटी और कटिहार के बीच पहली राजधानी एक्सप्रेस का शुभारंभ शामिल है।

प्रधानमंत्री ने न्यू जलपाईगुड़ी, न्यू कूचबिहार, न्यू बंगाईगांव, रंगिया और गुवाहाटी जैसे प्रमुख स्टेशनों सहित पूर्ण विद्युतीकृत कटिहार-लामडिंग मार्ग को समर्पित किया, जिससे इस क्षेत्र की कनेक्टिविटी को अधिक मजबूती मिली है। बिजलीकरण कार्य जारी रखते हुए, पूसीरे ने मालदा, सिलीगुड़ी और न्यू गुवाहाटी में इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव शेड स्थापित किए हैं और डीजल से इलेक्ट्रिक इंजनों में पूर्ण स्थानांतरण की सुविधा के लिए आगे विस्तार कार्य प्रगति पर है। माल परिवहन के लिए वर्तमान में विद्युत इंजनों की डब्ल्यूएजी9 श्रृंखला चल रही है और प्रमुख स्थानों पर लोको ट्रिप निरीक्षण शेड विकसित किए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त, पूसीरे को पूरे भारत में कई स्रोतों से बिजली खरीदने की अनुमति मिलने से विद्युत ऊर्जा पहल की पहुंच अपने उन्नत चरणों में है। असम में कई ट्रैक्शन सबस्टेशन भी चालू किए जा रहे हैं, ताकि बिजली की आपूर्ति बढ़ाई जा सके और राज्य के ग्रिड पर बोझ कम पड़े।

स्थिरता के प्रति भारतीय रेलवे की प्रतिबद्धता के अनुरूप, पूसीरे अपने रेलवे परिचालन में सौर और पवन ऊर्जा को सक्रियता से शामिल कर रहा है। अपने क्षेत्राधिकार में 50 एमडब्ल्यूपी सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने की योजना पर काम चल रहा है, जो हरित और अधिक ऊर्जा कुशल रेलवे नेटवर्क में परिवर्तन को सहयोग करेगा। पूर्ण बिजलीकरण के साथ, पूसीरे क्षेत्रीय विकास, पर्यटन और आर्थिक वृद्धि को और अधिक बढ़ावा देगा, जिससे रेल परिवहन अधिक कुशल और पर्यावरण के अनुकूल बन जाएगा। पूरी तरह से विद्युतीकृत, आत्मनिर्भर रेलवे नेटवर्क प्राप्त करने के विजन के साथ, पूसीरे भारत के हरित और सुदृढ़ भविष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने को तैयार है।

चूंकि भारत रेलवे विद्युतीकरण के 100 वर्ष पूरे कर चुका है तथा वाष्प एवं डीजल से विद्युत इंजनों में यह बदलाव आधुनिकीकरण, दक्षता और स्थिरता के प्रति देश की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। पूर्णतः विद्युतीकृत, आत्मनिर्भर रेलवे नेटवर्क अब पहुंच में है, जो भारतीय रेलवे में प्रगति के एक नए युग का मार्ग प्रशस्त करेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश