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प्रयागराज की तर्ज पर तपोभूमि चित्रकूट में हुई शाही अमृत स्नान की शुरुआत

 


--अखिल भारतीय विरक्त संत मंडल के नेतृत्व में साधु संतों ने की परंपरा की शुरुआत

चित्रकूट,26 फरवरी (हि.स.)। भगवान श्री राम की तपोस्थली चित्रकूट में साधु संतों ने प्रयागराज की तर्ज पर शाही सवारी निकाल कर मन्दाकिनी नदी में अमृत स्नान करने की परम्परा की शुरुआत कर दी है। बुधवार को ग्रामोदय विवि परिसर से कामदगिरि प्रमुख द्वार के महंत मदन गोपाल दास महाराज की अगुवाई में साधु संतों ने भव्य शाही सवारी निकाल कर रामघाट पहुंच मंदाकिनी गंगा में हजारों साधु संतों ने अमृत स्नान किया है।

बता दें कि कुम्भ या महाकुम्भ पड़ने पर तीर्थ स्थल प्रयागराज त्रिवेणी, हरिद्वार और नासिक में अमृत स्नान का अयोजन होता है,जिसमें देश के कोने कोने से श्रद्धालु स्नान, दर्शन व पूजन करने के लिए पहुंचते है। लेकिन चित्रकूट एक ऐसा तीर्थ स्थल है जहाँ तीर्थराज प्रयागराज खुद अपने पाप धोने के लिए मन्दाकिनी नदी में स्नान करने के लिए आते हैं। इसी मान्यता के अनुसार चित्रकूट के साधु संतों ने शाही सवारी निकालने और अमृत स्नान करने की पहल की शुरुआत की है।

अखिल भारतीय विरक्त संत मंडल चित्रकूट धाम और मन्दाकिनी आरती ट्रस्ट के नेतृत्व में साधु संतों ने मध्यप्रदेश के ग्रामोदय विश्वविद्यालय के पास से भव्य शाही सवारी निकाली गई जो अलग-अलग वाहनों पर साधु संत सवार होकर अमृत स्नान करने के लिए रामघाट के लिए निकले, जगह जगह श्रद्धालुओं ने साधु संतों पर पुष्प वर्षा कर उनका जोरदार स्वागत किया। साधु संत गाजे बाजे और हाथी घोड़ा के साथ रामघाट पहुचे जहाँ उन्होंने एक साथ मन्दाकिनी नदी में अमृत स्नान किया। इसके बाद उन्होंने भगवान लड्डू गोपाल की पूजा अर्चना की फिर माँ मन्दाकिनी नदी की आरती की। साधु संतों की इस पहल को देखकर श्रद्धांलुओं में काफी उत्साह नजर आया है।

कामदगिरि मंदिर के महंत मदन गोपाल दास जी महाराज का कहना है कि जब सारे तीर्थ स्नान के लिए तीर्थराज प्रयाग जाते है और तीर्थराज प्रयाग खुद चित्रकूट स्नान करने के लिए आते हैं तो चित्रकूट में अमृत स्नान का आयोजन क्यों नहीं जबकि सभी तीर्थ में अमृत स्नान का आयोजन किया जाता है। इसीलिए इस परंपरा की शुरुआत की गई है और आगे भी साधु-संतों के साथ बैठक कर इस परम परंपरा को बृहद रूप से जारी रखेंगे।

वहीं सनकादिक महाराज ने विवादित बयान देते हुए कहा है कि चित्रकूट में अमृत स्थान की नई परंपरा की शुरुआत की गई है इस संकल्प के साथ साधु संतों ने स्नान किया है कि जब मक्का में 40 किलोमीटर की दायरे में हिंदू भाई प्रवेश नहीं कर सकता तो चित्रकूट में मुसलमान भाई कैसे रह सकता है और हम रहने भी नहीं देंगे। अभी अमृत स्नान की परंपरा बुधवार को महाशिवरात्रि के अवसर पर की गई है आगे जब अर्ध कुम्भ पड़ेगा तो जैसे हरिद्वार की बैठक वृंदावन में होती है वैसे प्रयागराज की बैठक चित्रकूट में आयोजित करने की रणनीति बनाई जाएगी और इसी तरह इस अमृत इंसान की परंपरा को आगे बढ़ाते रहेंगे ।

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हिन्दुस्थान समाचार / रतन पटेल