अमेरिका में H-1B वीजा शुल्क पर अदालत का बड़ा फैसला, भारतीय पेशेवरों को मिलेगी राहत
अमेरिका में विदेशी पेशेवरों के लिए राहत
अमेरिका में नौकरी की तलाश कर रहे हजारों विदेशी पेशेवरों, विशेषकर भारतीयों, के लिए एक महत्वपूर्ण समाचार सामने आया है। मैसाचुसेट्स के बोस्टन में एक संघीय अदालत ने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा H-1B वीजा पर लगाए गए 1 लाख डॉलर के शुल्क को अवैध ठहराते हुए खारिज कर दिया है। यह निर्णय भारतीय IT पेशेवरों और अमेरिकी कंपनियों के लिए एक बड़ी जीत मानी जा रही है।
ट्रंप प्रशासन का शुल्क वृद्धि
ट्रंप प्रशासन ने सितंबर 2025 में H-1B वीजा आवेदन शुल्क को लगभग 2,000 डॉलर से बढ़ाकर 1 लाख डॉलर कर दिया था। सरकार का तर्क था कि इससे विदेशी श्रमिकों पर निर्भरता कम होगी और अमेरिकी नागरिकों के लिए अधिक रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे। हालांकि, इस निर्णय के खिलाफ कई कानूनी चुनौतियाँ आईं और अब बोस्टन की अदालत ने इसे कानून के खिलाफ करार दिया है।
भारतीय पेशेवरों को प्रमुख लाभ
H-1B वीजा का सबसे अधिक लाभ भारतीय पेशेवरों को मिलता है। अमेरिकी आंकड़ों के अनुसार, 2024 में जारी किए गए कुल H-1B वीजा में लगभग 70 प्रतिशत भारतीय नागरिकों को मिले थे। चीन दूसरे स्थान पर रहा, लेकिन उसकी हिस्सेदारी 12 प्रतिशत से भी कम थी। विशेषज्ञों का मानना है कि H-1B कार्यक्रम ने भारतीय मूल के लोगों को अमेरिका में उच्च आय और उच्च शिक्षा वाले वर्ग में पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
H-1B वीजा की विशेषताएँ
H-1B वीजा अमेरिका का एक विशेष कार्य वीजा है, जिसके माध्यम से अमेरिकी कंपनियाँ विदेशी विशेषज्ञों को नौकरी पर रखती हैं। यह वीजा मुख्य रूप से IT, इंजीनियरिंग, विज्ञान और तकनीकी क्षेत्रों से जुड़े पेशेवरों को दिया जाता है। हर साल लगभग 65,000 नियमित H-1B वीजा जारी किए जाते हैं, जबकि उच्च डिग्रीधारकों के लिए अतिरिक्त 20,000 वीजा उपलब्ध होते हैं। अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट, मेटा, एप्पल और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज जैसी कंपनियाँ इस कार्यक्रम का बड़े पैमाने पर उपयोग करती हैं।
कानूनी लड़ाई का आगे का रास्ता
हालांकि अदालत के इस निर्णय से फिलहाल राहत मिली है, लेकिन मामला अभी समाप्त नहीं हुआ है। व्हाइट हाउस ने संकेत दिया है कि वह इस आदेश को उच्च अदालत में चुनौती देगा। प्रशासन का कहना है कि H-1B कार्यक्रम का लंबे समय से दुरुपयोग होता रहा है और इसमें सुधार आवश्यक है। ऐसे में आने वाले महीनों में इस मुद्दे पर कानूनी और राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है। फिलहाल, अदालत के फैसले ने उन हजारों भारतीय पेशेवरों और कंपनियों को राहत दी है, जो बढ़ी हुई फीस के कारण चिंतित थे।