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क्या अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता संभव है? ट्रंप ने दिए संकेत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिए हैं। उन्होंने बातचीत की सकारात्मक दिशा की बात की, लेकिन चेतावनी भी दी कि यदि समझौता नहीं हुआ, तो सैन्य कार्रवाई की संभावना बनी रहेगी। इस बीच, पाकिस्तान मध्यस्थता की भूमिका निभा रहा है। जानें इस जटिल स्थिति का क्या होगा आगे।
 

अमेरिकी राष्ट्रपति का बयान


नई दिल्ली: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का हालिया बयान एक बार फिर से अमेरिका और ईरान के संबंधों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। ट्रंप ने संकेत दिया है कि दोनों देशों के बीच शांति समझौता एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि बातचीत सफल नहीं होती है, तो सैन्य कार्रवाई की संभावना फिर से खुल सकती है।


बातचीत की सकारात्मक दिशा

ट्रंप ने शनिवार को कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है। उन्होंने यह भी बताया कि एक ऐसा समझौता तैयार किया जा रहा है, जो ईरान को परमाणु हथियारों के विकास से रोक सकेगा।


सीबीएस न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में, ट्रंप ने कहा कि वह केवल उस समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे जिसमें अमेरिका की सभी शर्तें पूरी हों। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के संवर्धित यूरेनियम के मुद्दे का संतोषजनक समाधान आवश्यक है। ट्रंप के अनुसार, रविवार तक यह स्पष्ट हो जाएगा कि बातचीत आगे बढ़ेगी या अमेरिका सैन्य विकल्प अपनाएगा। उनके इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल पैदा कर दी है।


महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा

होर्मुज स्ट्रेट और तेल सप्लाई पर भी चर्चा


रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तावित समझौते में कई महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल हैं, जैसे होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह से खोलना, विदेशी बैंकों में फंसी ईरानी संपत्तियों को रिलीज करना, और दोनों देशों के बीच नियमित बातचीत जारी रखना। होर्मुज स्ट्रेट विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में से एक है, और यहां तनाव बढ़ने से वैश्विक तेल बाजार पर असर पड़ता है। यही कारण है कि अमेरिका और उसके सहयोगी इस मार्ग को खुला रखना चाहते हैं। ट्रंप ने कहा कि वह अमेरिकी वार्ताकार स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक करेंगे, जिसमें उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के शामिल होने की संभावना है।


पाकिस्तान की मध्यस्थता

पाकिस्तान भी निभा रहा मध्यस्थ की भूमिका


इस घटनाक्रम में पाकिस्तान की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर हाल ही में तेहरान गए थे, जहां उन्होंने ईरानी अधिकारियों से बातचीत की। पाकिस्तान ने दावा किया है कि ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत में 'उत्साहजनक प्रगति' हुई है, लेकिन अंतिम समझौते तक पहुंचने में समय लग सकता है। पाकिस्तान दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है ताकि क्षेत्र में तनाव कम किया जा सके।


ट्रंप की चेतावनी

ट्रंप की कड़ी चेतावनी


बातचीत के दौरान ट्रंप का आक्रामक रुख भी देखने को मिला। उन्होंने कहा कि यदि समझौता नहीं हुआ, तो ईरान को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। ट्रंप ने कहा, 'या तो एक अच्छा समझौता होगा या फिर मैं उन्हें जहन्नुम में भेज दूंगा।' उनके इस बयान ने माहौल को और गर्म कर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि यदि दोनों देशों के बीच समझौता नहीं होता है, तो ईरान पर ऐसा असर पड़ेगा जैसा पहले कभी नहीं देखा गया। पिछले कुछ हफ्तों से ट्रंप कूटनीतिक बातचीत और सैन्य कार्रवाई की चेतावनी के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।


ईरान का अविश्वास

ईरान ने जताया अविश्वास


दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिका पर भरोसा न होने की बात दोहराई है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर कलीबाफ ने कहा कि अमेरिका पर भरोसा करना कठिन है क्योंकि उसने पहले भी समझौतों का पालन नहीं किया। उन्होंने कहा कि ईरान अपने राष्ट्रीय हितों और अधिकारों से पीछे नहीं हटेगा। कलीबाफ के अनुसार, ईरान बातचीत भी करेगा और जरूरत पड़ने पर अपने बचाव के लिए पूरी मजबूती से खड़ा भी रहेगा। ईरानी नेताओं का आरोप है कि अमेरिका ने पहले बातचीत के दौरान भी तनाव बढ़ाया और अब फिर से समझौते की बात कर रहा है।