केंद्रीय बजट 2026: राजकोषीय घाटे को 4.4% तक लाने का लक्ष्य
राजकोषीय घाटे पर नियंत्रण का फोकस
केंद्रीय बजट 2026 में राजकोषीय घाटे पर नियंत्रण और कर्ज में स्थिरता पर रहेगा फोकस
कोविड-19 के दौरान राजकोषीय घाटा लगभग 9% था, जो वर्तमान वित्तीय वर्ष में घटकर 4.8% हो गया है। सरकार का लक्ष्य इसे 4.4% तक लाना है। महेंद्र देव के अनुसार, केंद्र सरकार का कर्ज-जीडीपी अनुपात लगभग 56.1% है, जबकि केंद्र और राज्यों का संयुक्त कर्ज 80% के करीब है, जो 2030 तक घटकर 76% हो सकता है।
उच्च और टिकाऊ वृद्धि पर जोर
महेंद्र देव ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उच्च और टिकाऊ आर्थिक वृद्धि आवश्यक है। उन्होंने बताया कि 7-8% की विकास दर बनाए रखने के लिए लगभग 35% का निवेश अनुपात जरूरी है, जबकि वर्तमान में यह 30% है। निवेश की दक्षता में सुधार की आवश्यकता पर भी उन्होंने जोर दिया।
वैश्विक चुनौतियों का सामना
देव ने वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की रणनीति आत्मनिर्भरता पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि प्रतिस्पर्धी और गुणवत्तापूर्ण विनिर्माण को बढ़ावा देकर भारत निवेशकों के लिए एक आकर्षक गंतव्य बन सकता है।
राज्यों की भूमिका
महेंद्र देव ने पिछले एक दशक में किए गए सुधारों जैसे जीएसटी, आयकर सुधार, श्रम संहिताएं, और बीमा क्षेत्र में एफडीआई के उदारीकरण को निजी निवेश और दक्षता बढ़ाने वाला बताया। उन्होंने कहा कि विकसित देश बनने की दिशा में राज्यों की भूमिका महत्वपूर्ण है और प्रत्येक राज्य को अपने लक्ष्य और कार्यान्वयन तंत्र निर्धारित करने होंगे।
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