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कैट ने अमेजन के खिलाफ हाई कोर्ट के फैसले का उचित ठहराया, कड़ी कार्रवाई की मांग

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कैट ने अमेजन के खिलाफ हाई कोर्ट के फैसले का उचित ठहराया, कड़ी कार्रवाई की मांग


नई दिल्ली, 27 फरवरी (हि.स.)। कन्‍फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने गुरुवार को दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले का उचित ठहराया है। कैट के राष्‍ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने केंद्र सरकार और नियामक संस्थाओं से आग्रह किया है कि ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन की बार-बार होने वाली गलत गतिविधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही उन्‍होंने भारतीय व्यवसायों को विदेशी ई-कॉमर्स कंपनियों के अनैतिक और अवैध व्यापारिक तौर-तरीकों से बचाने के लिए उचित नीतियां लागू करने की मांग की है।

हाई कोर्ट ने अमेजन पर 'बेवर्ली हिल्स पोलो क्लब' ट्रेडमार्क का उल्लंघन करने के मामले में 39 मिलियन डॉलर (करीब 340 करोड़ रुपये) का हर्जाना लगाया है।इसके दूसरे दिन खंडेलवाल ने कहा कि अमेजन के खिलाफ हाई कोर्ट के इस फैसले से यह स्पष्ट होता है कि ई-कॉमर्स प्‍लेटफॉर्म से ट्रेडमार्क अनुपालन उपायों को लागू कराने की सख्त जरूरत है। खंडेलवाल ने कहा कि इस निर्णय का भारत में संचालित ऑनलाइन मार्केटप्लेस पर दूरगामी प्रभाव पड़ेगा। उन्‍होंने कहा कि हाई कोर्ट का ये निर्णय ब्रांड मालिकों के लिए एक बड़ी जीत है और डिजिटल युग में भारतीय न्यायपालिका की बौद्धिक संपदा अधिकारों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

उन्‍होंने कहा कि अमेजन का कानूनी उल्लंघनों का एक लंबा इतिहास रहा है, जिसमें नकली उत्पादों की बिक्री, कर चोरी, और भारत के ई-कॉमर्स नियमों का उल्लंघन शामिल है। कैट महामंत्री ने कहा कि बार-बार चेतावनियों और कानूनी कार्रवाई के बावजूद यह प्लेटफॉर्म छोटे व्यवसायों का शोषण करने, उपभोक्ताओं को गुमराह करने और भारतीय कानूनों की अवहेलना करने में लिप्त रहा है। न्यायालय का यह ताजा निर्णय अमेजन की गैर-जिम्मेदार व्यावसायिक प्रथाओं और प्रभावी अनुपालन उपायों को लागू करने में विफलता का प्रमाण है।

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया ने कहा कि भारत में संचालित ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को अपने मंच पर होने वाली अवैध और अनैतिक गतिविधियों के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि अब समय आ गया है कि सख्त नियामक निगरानी संस्‍था बनाने के साथ दंडात्मक कार्रवाई की जाए, ताकि बहुराष्ट्रीय कंपनियां अब भारत के व्यापार तंत्र को कमजोर करने और व्यापारियों, उपभोक्ताओं और ब्रांड मालिकों के अधिकारों का उल्लंघन करने से बाज आएं।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर