भारत की अर्थव्यवस्था में सकारात्मक संकेत: चालू खाते में अधिशेष
चालू खाते में अधिशेष का महत्व
भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक उत्साहवर्धक खबर आई है। वित्त वर्ष 2025-26 की जनवरी से मार्च तिमाही में देश के चालू खाते में 7.1 अरब डॉलर का अधिशेष दर्ज किया गया है, जो सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 0.7 प्रतिशत है। हालांकि, पिछले वर्ष की इसी अवधि में यह अधिशेष 13.7 अरब डॉलर या सकल घरेलू उत्पाद का 1.4 प्रतिशत था। फिर भी, कई अर्थशास्त्रियों के पूर्वानुमानों के विपरीत, इस बार घाटे के बजाय अधिशेष का होना चर्चा का विषय है।
चालू खाते का आंकड़ा
चालू खाते का आंकड़ा किसी देश के विदेशों के साथ व्यापार, सेवाओं, निवेश आय और विदेशों से आने वाले धन के प्रवाह को दर्शाता है। जब आयात निर्यात से अधिक हो जाता है, तो आमतौर पर चालू खाते में घाटा होता है। ऐसे में अधिशेष का होना अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जाता है।
प्रवासी भारतीयों का योगदान
इस बार चालू खाते में अधिशेष का सबसे बड़ा कारण विदेशों में काम कर रहे भारतीयों द्वारा भेजी गई धनराशि का बढ़ना है। जनवरी से मार्च तिमाही में प्रवासी भारतीयों से प्राप्त धनराशि में सालाना आधार पर 31 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो 41.3 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। यही वजह है कि कई विशेषज्ञों के घाटे के पूर्वानुमान के बावजूद चालू खाते में अधिशेष दर्ज किया गया।
वस्तु व्यापार घाटा
भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, चौथी तिमाही में देश का वस्तु व्यापार घाटा बढ़कर 83.4 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 59.3 अरब डॉलर था। इसका मुख्य कारण आयात में तेज वृद्धि है।
आयात और निर्यात का अंतर
इस दौरान देश का आयात 196.6 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जबकि निर्यात लगभग स्थिर रहकर 113.1 अरब डॉलर पर बना रहा। आयात और निर्यात के बीच बढ़ते अंतर ने व्यापार घाटे को और बढ़ा दिया है।
सेवा क्षेत्र की भूमिका
हालांकि, व्यापार घाटे में इस वृद्धि की आंशिक भरपाई सेवा क्षेत्र की मजबूत कमाई और विदेशों से आने वाली धनराशि ने की है। सेवा क्षेत्र से शुद्ध प्राप्तियां बढ़कर 60.4 अरब डॉलर हो गई हैं, जो पिछले वर्ष 53.3 अरब डॉलर थीं। इसमें संगणक सेवाओं और अन्य व्यावसायिक सेवाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
निवेश आय में कमी
विदेशों में रहने वाले भारतीयों द्वारा भेजी गई व्यक्तिगत धनराशि भी बढ़कर 43.5 अरब डॉलर तक पहुंच गई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 33.9 अरब डॉलर थी। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया, उत्तरी अमेरिका और अन्य देशों में कार्यरत भारतीय पेशेवरों की बढ़ती आय इसका प्रमुख कारण हो सकती है।
कैपिटल फ्लो के संकेत
निवेश आय से संबंधित प्राथमिक आय खाते का घाटा भी कुछ कम हुआ है, जो घटकर 11.1 अरब डॉलर रह गया है। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का शुद्ध प्रवाह बढ़कर 4.2 अरब डॉलर हो गया है, जबकि पिछले वर्ष यह केवल 0.4 अरब डॉलर था। दूसरी ओर, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की निकासी बढ़कर 12 अरब डॉलर तक पहुंच गई है।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते व्यापार घाटे के बावजूद सेवा निर्यात और प्रवासी भारतीयों से आने वाली मजबूत धनराशि फिलहाल भारतीय अर्थव्यवस्था को संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
