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भारत में सेमीकंडक्टर आयात पर निर्भरता: नीति आयोग की नई रिपोर्ट

नीति आयोग की हालिया रिपोर्ट में भारत की सेमीकंडक्टर आयात पर निर्भरता का विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले आठ वर्षों में भारत ने 14 लाख करोड़ रुपये का सेमीकंडक्टर उत्पादों का आयात किया है। इसके अलावा, आयोग ने सुझाव दिया है कि भारत को अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए कदम उठाने की आवश्यकता है। जानें इस रिपोर्ट में क्या सिफारिशें की गई हैं और भविष्य में सेमीकंडक्टर बाजार की संभावनाएँ क्या हैं।
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भारत में सेमीकंडक्टर आयात पर निर्भरता: नीति आयोग की नई रिपोर्ट

सेमीकंडक्टर का महत्व

डिजिटल और इलेक्ट्रिक वाहनों के युग में, सेमीकंडक्टर एक महत्वपूर्ण तत्व बन गया है। भारत ने इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए कई पहल शुरू की हैं। नीति आयोग की हालिया रिपोर्ट में बताया गया है कि सेमीकंडक्टर से संबंधित उत्पादों के आयात पर भारत को भारी खर्च उठाना पड़ रहा है, जो देश की विदेशी मुद्रा पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है। पिछले आठ वर्षों में, भारत ने लगभग 14 लाख करोड़ रुपये का सेमीकंडक्टर उत्पादों का आयात किया है। पिछले दो वर्षों में, हर साल लगभग 30 प्रतिशत अधिक आयात की प्रवृत्ति देखी गई है.


सेमीकंडक्टर की बढ़ती मांग

वर्तमान में, इलेक्ट्रिक वाहनों, सॉफ्टवेयर-आधारित वाहनों, एआई-आधारित उपकरणों, और डेटा प्रोसेसिंग यूनिट्स के संचालन में सेमीकंडक्टर की अत्यधिक आवश्यकता होती है। यही कारण है कि न केवल भारत, बल्कि वैश्विक स्तर पर इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है। 2024 में, वैश्विक सेमीकंडक्टर बाजार का आकार 631 बिलियन डॉलर था, जो 2030 तक 1029 बिलियन डॉलर और 2035 तक 1547 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है.


नीति आयोग की सिफारिशें

नीति आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत को अडवांस पैकेजिंग, चिपलेट निर्माण, और कम ऊर्जा खपत वाले चिप्स के डिजाइन पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। आयोग ने यह भी चेतावनी दी है कि भारत की आयात पर निर्भरता देश की सुरक्षा को खतरे में डाल सकती है और विदेशी मुद्रा भंडार को प्रभावित कर सकती है.


आयात पर खर्च का आंकड़ा

नीति आयोग के अनुसार, सेमीकंडक्टर के आयात पर भारत ने पिछले आठ वर्षों में 150 बिलियन डॉलर (लगभग 14.34 लाख करोड़ रुपये) खर्च किए हैं। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि सेमीकंडक्टर के उपयोग में वृद्धि के साथ, भविष्य में आयात और खर्च में और वृद्धि होने की संभावना है.


आयात में वृद्धि की प्रवृत्ति

पिछले आठ वर्षों के आंकड़ों के अनुसार, हर साल आयात में वृद्धि हुई है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2021 में 11.9 प्रतिशत, 2022 में 21.6 प्रतिशत, 2023 में 19.9 प्रतिशत, 2024 में 28.7 प्रतिशत, और 2025 में 30.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यदि यह प्रवृत्ति जारी रहती है, तो 2035 तक सालाना आयात 240 बिलियन डॉलर (23 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंच सकता है.


नीति आयोग की दृष्टि

नीति आयोग का मानना है कि भारत को सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए पहले कदम उठाने की आवश्यकता है। इसके बाद, भारत वैश्विक सप्लाई चेन में योगदान कर सकता है। आयोग ने सुझाव दिया है कि भारत को एआई के लिए चिप डिजाइन, वैश्विक चिप बाजार में 10-13 प्रतिशत हिस्सेदारी, और 2030 तक अपनी जरूरत का 15-25 प्रतिशत चिप उत्पादन करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए.


चुनौतियाँ और संभावनाएँ

हालांकि, नीति आयोग ने यह भी स्वीकार किया है कि संसाधनों, वित्त, प्रतिभा, और प्रौद्योगिकी की कमी जैसी बाधाएँ इस दिशा में प्रगति को कठिन बना सकती हैं.