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सरकार का नया कदम: ईंधन वितरण की सटीकता बढ़ाने के लिए नए नियम लागू

केंद्र सरकार ने उपभोक्ताओं के हित में ईंधन वितरण की सटीकता बढ़ाने के लिए नए नियम लागू किए हैं। अब पेट्रोल, डीजल, सीएनजी, एलपीजी, एलएनजी और हाइड्रोजन ईंधन के डिस्पेंसरों की जांच सरकारी मान्यता प्राप्त परीक्षण केंद्रों द्वारा की जाएगी। इस निर्णय का उद्देश्य उपभोक्ताओं को सही मात्रा में ईंधन उपलब्ध कराना और लेनदेन में पारदर्शिता बढ़ाना है। नए नियमों के तहत जांच शुल्क भी निर्धारित किए गए हैं, और राज्य सरकारों को अधिक अधिकार दिए गए हैं।
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सरकार का नया कदम: ईंधन वितरण की सटीकता बढ़ाने के लिए नए नियम लागू

सरकार का बड़ा निर्णय

देश में स्वच्छ ईंधन के उपयोग में वृद्धि के साथ, केंद्र सरकार ने उपभोक्ताओं के हित में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब पेट्रोल, डीजल के साथ-साथ सीएनजी, एलपीजी, एलएनजी और हाइड्रोजन ईंधन के डिस्पेंसरों की जांच सरकारी मान्यता प्राप्त परीक्षण केंद्रों द्वारा की जाएगी।


नियमों में संशोधन

उपभोक्ता मामले मंत्रालय ने 24 मई 2026 को कानूनी माप विज्ञान (सरकारी मान्यता प्राप्त परीक्षण केंद्र) नियम 2013 में संशोधन किया है। सरकार का कहना है कि इस निर्णय का उद्देश्य ईंधन वितरण में सटीकता को बढ़ाना, उपभोक्ताओं को सही मात्रा में ईंधन उपलब्ध कराना और राज्यों के विभागों पर बढ़ते दबाव को कम करना है।


जांच की नई व्यवस्था

पहले, सरकारी मान्यता प्राप्त परीक्षण केंद्र केवल 18 प्रकार के माप और तौल उपकरणों की जांच करते थे। अब पांच नए ईंधन वितरण तंत्र जोड़े गए हैं, जिससे यह संख्या 23 हो गई है।


स्वच्छ ईंधन की बढ़ती मांग

हाल के वर्षों में देश में स्वच्छ ईंधन की मांग में तेजी आई है। विशेष रूप से सीएनजी और एलएनजी आधारित परिवहन को बढ़ावा दिया जा रहा है, जबकि हाइड्रोजन ईंधन को भविष्य के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। ऐसे में सरकार इन ईंधन वितरण मशीनों की सटीकता की जांच को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।


उपभोक्ताओं का विश्वास

सरकार का मानना है कि इस बदलाव से उपभोक्ताओं को यह विश्वास मिलेगा कि उन्हें पेट्रोल पंप या गैस स्टेशन पर जितना ईंधन दिखाया जा रहा है, उतना ही वास्तव में मिल रहा है। इससे लेनदेन में पारदर्शिता बढ़ेगी और उपभोक्ताओं के हितों की बेहतर सुरक्षा होगी।


नए जांच शुल्क

नए नियमों के तहत, जांच शुल्क भी निर्धारित किए गए हैं। पेट्रोल और डीजल डिस्पेंसर की जांच के लिए प्रति नोजल 5,000 रुपये और सीएनजी, एलपीजी, एलएनजी और हाइड्रोजन डिस्पेंसर के लिए प्रति नोजल 10,000 रुपये शुल्क रखा गया है।


निजी प्रयोगशालाओं की भागीदारी

मंत्रालय के अनुसार, इस नई व्यवस्था से निजी प्रयोगशालाओं और उद्योगों की भागीदारी भी बढ़ेगी। तकनीकी क्षमता वाले संस्थान अब सरकारी मान्यता प्राप्त परीक्षण केंद्र के रूप में कार्य कर सकेंगे, जिससे जांच प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है।


राज्य सरकारों को अधिक अधिकार

राज्य सरकारों को भी अधिक अधिकार दिए गए हैं। अब वे अपने स्थानीय जरूरतों के अनुसार अतिरिक्त माप और तौल उपकरणों को जीएटीसी व्यवस्था के तहत जांच के लिए अधिसूचित कर सकेंगे।


प्रशासनिक प्रक्रिया में तेजी

सरकार ने प्रशासनिक प्रक्रिया को तेज करने के लिए संयुक्त सचिव स्तर और उससे ऊपर के अधिकारियों को नियमों से जुड़े मामलों में मंजूरी देने का अधिकार दिया है। इससे स्वीकृति और अन्य प्रक्रियाओं में देरी कम होने की संभावना है।


महत्वपूर्ण भूमिका

उपभोक्ता मामले मंत्रालय ने कहा है कि सरकारी मान्यता प्राप्त परीक्षण केंद्र पहले से ही देशभर में तौल और माप उपकरणों की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। अब इनके दायरे के बढ़ने से राज्य कानूनी माप विज्ञान विभाग निरीक्षण, कार्रवाई और उपभोक्ता शिकायतों के निपटारे पर अधिक ध्यान दे सकेंगे।