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दूरदर्शन के क्लासिक शो: जब विक्रम और बेताल ने किया था सबको मंत्रमुग्ध

दूरदर्शन के क्लासिक शो 'विक्रम और बेताल' ने 1985 में भारतीय टेलीविज़न पर धूम मचाई। यह शो राजा विक्रमादित्य और बेताल की दिलचस्प कहानियों पर आधारित था, जिसने दर्शकों को हर हफ्ते अपने टीवी से जोड़े रखा। जानें इस शो की लोकप्रियता और इसके अद्भुत कलाकारों के बारे में।
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दूरदर्शन के क्लासिक शो: जब विक्रम और बेताल ने किया था सबको मंत्रमुग्ध

दूरदर्शन के क्लासिक शो


दूरदर्शन के क्लासिक शो: भारतीय टेलीविज़न के शुरुआती दिनों में, जब सैकड़ों चैनल नहीं थे, तब दूरदर्शन ही एकमात्र मनोरंजन का साधन था। हर शाम, परिवार एक साथ बैठकर अपने पसंदीदा कार्यक्रमों का आनंद लेते थे, जो उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गए थे।


41 साल पहले का लोकप्रिय शो

रामानंद सागर की रामायण के पहले, एक और फैंटेसी ड्रामा ने दर्शकों का ध्यान खींचा था। यह शो था 'विक्रम और बेताल', जो 1985 में दूरदर्शन पर प्रसारित हुआ और जल्दी ही भारतीय टेलीविज़न का एक प्रिय कार्यक्रम बन गया।


इस शो की लोकप्रियता इतनी थी कि हर उम्र के दर्शक हर हफ्ते नए एपिसोड का इंतज़ार करते थे। इसके बिना वीकेंड अधूरा सा लगता था।


कहानियों का जादू

यह शो भारतीय लोककथाओं के संग्रह 'बैताल पचीसी' पर आधारित था, जिसमें राजा विक्रमादित्य और रहस्यमय आत्मा बेताल के बीच की दिलचस्प कहानियाँ सुनाई जाती थीं। हर एपिसोड में बेताल एक नई कहानी सुनाता था, जो एक नैतिक दुविधा के साथ समाप्त होती थी।


बेताल राजा विक्रम को एक शर्त पर चुनौती देता था: उसे कहानी पूरी तरह चुपचाप सुननी होगी। लेकिन जब राजा बेताल के सवाल का जवाब देता, तो बेताल भाग जाता, जिससे विक्रम को फिर से उसका पीछा करना पड़ता।


शो की अद्भुत कास्ट

इस शो में राजा विक्रमादित्य का किरदार अरुण गोविल ने निभाया, जबकि सज्जन लाल पुरोहित ने बेताल का रोल किया। इसके अलावा, अरविंद त्रिवेदी, दीपिका चिखलिया, विजय अरोड़ा, सुनील लहरी, लिलिपुट और समीर राजदा जैसे कलाकारों ने भी शानदार प्रदर्शन किया।


दूरदर्शन का अमिट निशान

1985 से 1986 तक हर रविवार शाम को प्रसारित होने वाला 'विक्रम और बेताल' दूरदर्शन के सबसे प्रिय क्लासिक्स में से एक है। आज भी, इस शो की यादगार कहानियाँ और नैतिक सीख उन दर्शकों के दिलों में ताज़ा हैं, जिन्होंने भारतीय टेलीविज़न के सुनहरे दिनों का अनुभव किया।