भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: अमेरिकी किसानों के लिए बड़ी जीत, भारत पर संभावित प्रभाव
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता
नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते को व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलाइन लेविट ने अमेरिकी श्रमिकों और व्यवसायों के लिए एक 'महान जीत' बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह डील मुख्य रूप से अमेरिका के लाभ में है। भारत को कुछ रियायतें मिली हैं, लेकिन दीर्घकालिक दृष्टिकोण से नुकसान भी हो सकता है। इस समझौते के तहत भारत को रूसी तेल की खरीद बंद करने और अमेरिकी उत्पादों पर शून्य कर लगाने जैसे कदम उठाने पड़ सकते हैं, जिससे ऊर्जा लागत में वृद्धि और कृषि क्षेत्र पर दबाव पड़ सकता है।
White House Press Secretary Karoline Leavitt on President Trump deal with India: "Prime Minister Modi committed to $500B of purchases of U.S. energy, transportation, agricultural products. This is a great deal, and a huge win for American workers, businesses, and consumers… pic.twitter.com/K7o61KQY7k
— OSINT Spectator (@osint1117) February 3, 2026
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलाइन लेविट ने कहा कि इस समझौते से अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारत के विशाल बाजार में अधिक पहुंच मिलेगी, जिससे अमेरिकी किसानों की आय में वृद्धि होगी। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर ने बताया कि यह समझौता भारत के औद्योगिक क्षेत्र को खोल देगा, जहां शुल्क को 13.5 प्रतिशत से घटाकर शून्य प्रतिशत किया जाएगा।
अमेरिकी कांग्रेस के प्रमुख सदस्यों ने इस समझौते पर खुशी जताई है। अमेरिकी व्यापार संगठनों ने इसे अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए लाभकारी माना है। अमेरिकी कृषि मंत्री ब्रूक रोलिन्स ने कहा कि यह समझौता अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारत में अधिक पहुंच देगा, जिससे 2024 में 1.3 अरब डॉलर का व्यापार घाटा कम होगा।
India will lower tariffs on a wide array of U.S. industrial and agricultural goods to 0%.
President Trump’s historic deal with India delivers unprecedented market access for American farmers and producers.pic.twitter.com/qsTTOwKlIt
— United States Trade Representative (@USTradeRep) February 3, 2026
यूएस के व्यापार प्रतिनिधि ने सीएनबीसी पर कहा कि भारत अमेरिका के औद्योगिक और कृषि उत्पादों पर टैरिफ को 0% कर देगा। इस ऐतिहासिक समझौते से अमेरिकी किसानों और उत्पादकों को अभूतपूर्व बाजार पहुंच प्राप्त होगी।
अमेरिकी कृषि सचिव ब्रूक रॉलिन्स ने कहा कि यह डील अमेरिकी फार्म प्रोडक्ट्स को भारत के बड़े बाजार में ज्यादा निर्यात करने देगी, जिससे अमेरिकी किसानों की कमाई बढ़ेगी।
ब्रूक रॉलिन्स ने बताया कि अमेरिका का भारत के साथ कृषि व्यापार घाटा 1.3 अरब डॉलर है और भारत की बढ़ती जनसंख्या अमेरिकी उत्पादों के लिए एक बड़ा बाजार है।
Thank you @POTUS for ONCE AGAIN delivering for our American farmers.
New US-India deal will export more American farm products to India's massive market, lifting prices, and pumping cash into rural America.
In 2024, America’s agricultural trade deficit with India was $1.3… https://t.co/Z04eNDfXjD
— Secretary Brooke Rollins (@SecRollins) February 2, 2026
किसकी बड़ी जीत?
अधिकांश अमेरिकी स्रोतों और विश्लेषकों के अनुसार, यह समझौता मुख्य रूप से अमेरिका की जीत है। ट्रंप ने इसे 'लंबे समय से प्रतीक्षित' करार दिया, जिसमें अमेरिका को 500 अरब डॉलर से अधिक के ऑर्डर मिलेंगे, रूसी तेल पर निर्भरता कम होगी और भारत का बाजार अमेरिकी उत्पादों के लिए खुल जाएगा। अटलांटिक काउंसिल के विशेषज्ञों ने कहा कि यह समझौता अमेरिका-भारत संबंधों में तनाव को कम करेगा और अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा, जबकि भारत को भारी टैक्स से राहत मिलेगी।
भारत को क्या नुकसान?
विश्लेषकों के अनुसार, भारत को कई मोर्चों पर नुकसान हो सकता है। सबसे बड़ा नुकसान रूसी तेल की खरीद बंद करने से होगा, जो सस्ता था और अब अमेरिकी या वेनेजुएला का तेल महंगा पड़ेगा, जिससे ऊर्जा लागत बढ़ेगी। समझौते में भारत को अमेरिकी सामानों पर शुल्क शून्य करने पड़ेंगे, जबकि अमेरिका 18 प्रतिशत शुल्क रखेगा, जिससे भारतीय निर्यातकों को नुकसान हो सकता है।
कृषि क्षेत्र की चिन्ता
कृषि क्षेत्र में चिंता है कि अमेरिकी सब्सिडी वाले उत्पाद जैसे मक्का, सोयाबीन और गेहूं भारत में डंपिंग कर सकते हैं, जिससे भारतीय किसानों की आय घटेगी। सेफ फूड अलायंस के सदस्य ने कहा, 'अगर ये उत्पाद भारत में आएंगे, तो यह हमारे किसानों, स्वास्थ्य, पारिस्थितिकी और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाएगा।' हालांकि, भारत ने संवेदनशील क्षेत्रों को सुरक्षित रखा है, लेकिन दबाव बरकरार है।
समझौते की पूरी जानकारी अभी भी ठीक से सामने नहीं आई है, लेकिन अमेरिकी स्रोतों से लगता है कि यह अमेरिका की रणनीतिक जीत है, जबकि भारत को व्यापार संतुलन और ऊर्जा सुरक्षा में चुनौतियां मिल सकती हैं। दोनों देश इस पर संयुक्त बयान जारी कर सकते हैं।
