महिला कैब ड्राइवर नंदिनी की प्रेरक कहानी: सशक्तिकरण की नई मिसाल
महिला सशक्तिकरण की अनोखी कहानी
हैदराबाद. आज के समय में जब हम महिला सशक्तिकरण की चर्चा करते हैं, तो अक्सर बड़े कॉर्पोरेट दफ्तरों या राजनीतिक परिदृश्यों की छवि सामने आती है। लेकिन असली सशक्तिकरण कभी-कभी कैब की अगली सीट पर भी देखने को मिलता है। हैदराबाद में एक महिला कैब ड्राइवर नंदिनी की कहानी इन दिनों इंटरनेट पर चर्चा का विषय बनी हुई है। वह अपनी मेहनत और हिम्मत से न केवल तीन बच्चों का पालन-पोषण कर रही हैं, बल्कि समाज की पुरानी धारणाओं को भी चुनौती दे रही हैं।
नंदिनी एक सिंगल मदर हैं और विजयवाड़ा की निवासी हैं। अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा और जीवन देने के लिए उन्होंने हैदराबाद जैसे बड़े शहर को अपने काम का स्थान चुना। पिछले एक साल से वह हैदराबाद की व्यस्त सड़कों पर उबर (Uber) कैब चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं।
जब दो ड्राइवरों ने मना किया, तब नंदिनी बनीं सहारा
नंदिनी की प्रेरणादायक कहानी तब सामने आई जब हैदराबाद के निवासी सुरेश कोचाटिल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर अपने अनुभव साझा किए। सुरेश एक टीवी डिबेट के लिए स्टूडियो जा रहे थे और उन्होंने अपनी यात्रा के लिए उबर कैब बुक की थी। लेकिन उनके साथ कुछ ऐसा हुआ जो अक्सर यात्रियों के साथ होता है। दो पुरुष ड्राइवरों ने उनकी बुकिंग स्वीकार की और फिर अचानक उसे रद्द कर दिया।
Today, I was using cabs to travel from one studio to another for the Union Budget debates. When I booked a @Uber_India cab from Nationalist Hub to 99TV in Hyderabad and two of the drivers cancelled after accepting the booking. @Uber automatically assigned a third driver and I… pic.twitter.com/aR194nbLHE
— Suresh Kochattil (@kochattil) February 1, 2026
तभी सिस्टम ने तीसरी बार बुकिंग असाइन की और इस बार एक महिला ड्राइवर का नाम स्क्रीन पर आया। वह नंदिनी थीं। सुरेश ने बताया कि नंदिनी को गाड़ी चलाते देख उन्हें सुखद आश्चर्य हुआ। बातचीत के दौरान उन्हें पता चला कि वह एक सिंगल मदर हैं और अपने परिवार की एकमात्र सहारा हैं।
महिला सशक्तिकरण का एक जीवंत उदाहरण
नंदिनी की कहानी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह किसी मजबूरी का रोना नहीं रोती, बल्कि मेहनत को अपना हथियार बनाती हैं। भारत में कैब ड्राइविंग जैसे क्षेत्र में पुरुषों का दबदबा है। ऐसे में एक महिला का देर रात तक या व्यस्त सड़कों पर सुरक्षित ड्राइविंग करना एक बड़े बदलाव का संकेत है।
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कठिन संघर्ष: विजयवाड़ा से हैदराबाद आकर बसना और अजनबी शहर में रास्ता बनाना आसान नहीं था।
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बच्चों की शिक्षा: नंदिनी का एकमात्र लक्ष्य अपने तीन बच्चों को पढ़ा-लिखाकर काबिल बनाना है।
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सोशल मीडिया की सराहना: सुरेश के पोस्ट को अब तक 3 लाख से ज्यादा लोग देख चुके हैं और हजारों लोगों ने नंदिनी के जज्बे को सलाम किया है।
क्यों खास है नंदिनी जैसी महिलाओं की भूमिका
सुरेश कोचाटिल ने अपने पोस्ट में लिखा कि मीडिया में जिस सशक्तिकरण की बातें होती हैं, नंदिनी उसका वास्तविक चेहरा हैं। जब एक महिला स्टेयरिंग व्हील थामती है, तो वह न केवल एक गाड़ी चला रही होती है, बल्कि अपनी किस्मत भी खुद लिख रही होती है।
आजकल गिग इकोनॉमी (Gig Economy) ने महिलाओं के लिए नए दरवाजे खोले हैं। उबर जैसी कंपनियां महिला ड्राइवरों को प्रोत्साहित कर रही हैं जिससे सुरक्षा और रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। नंदिनी की कहानी यह साबित करती है कि यदि मन में दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो कोई भी काम छोटा नहीं होता और कोई भी मंजिल दूर नहीं होती।
