योगी सरकार का नया आदेश: सरकारी कर्मचारियों को संपत्ति विवरण दर्ज कराने का निर्देश
लखनऊ में योगी सरकार का महत्वपूर्ण आदेश
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राज्य के सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। इसके तहत सभी सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को अपनी चल और अचल संपत्ति का विवरण मानव संपदा पोर्टल (Manav Sampada Portal) पर समय-समय पर दर्ज करना होगा। यह आदेश कर्मचारी आचरण नियमावली, 1956 के अंतर्गत दिया गया है।
मुख्य सचिव एसपी गोयल द्वारा जारी आदेश के अनुसार, सभी सरकारी अधिकारी और कर्मचारी, जिनमें राज्य शासन के स्वायत्त संस्थान, निगम और उपक्रमों के कर्मचारी भी शामिल हैं, को अपनी संपत्ति का विवरण 31 दिसंबर 2025 तक मानव संपदा पोर्टल पर प्रस्तुत करना होगा। पोर्टल पर संपत्ति का विवरण दर्ज करने की सुविधा 1 जनवरी 2026 से उपलब्ध होगी। यदि कोई कर्मचारी 1 फरवरी 2026 तक अपनी संपत्ति का विवरण प्रस्तुत नहीं करता है, तो उसकी पदोन्नति पर विचार नहीं किया जाएगा।
मुख्य सचिव ने यह भी बताया कि नियमों का पालन न करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी, जो उत्तर प्रदेश सरकार के कर्मचारी आचरण नियमावली, 1999 के तहत होगी। जिन विभागों या कर्मियों को पहले से संपत्ति विवरण प्रस्तुत करने में छूट दी गई थी, वह छूट अगले आदेश तक जारी रहेगी।
आदेश का उद्देश्य
मुख्य सचिव एसपी गोयल ने कहा कि सरकार का यह कदम पारदर्शिता और ईमानदारी को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है। इससे सरकारी कर्मचारियों की संपत्ति की सही जानकारी मिलेगी और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। यह व्यवस्था राज्य में बेहतर प्रशासनिक नियंत्रण सुनिश्चित करेगी।
किसे यह आदेश लागू होगा?
यह आदेश प्रदेश के सभी सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों, स्वायत्त संस्थानों, निगमों और उपक्रमों के कर्मचारियों पर लागू होगा। इसके साथ ही विभिन्न विभागों के मुख्य सचिव, सचिव, पुलिस महानिदेशक, लोक सेवा आयोग के सचिव आदि सभी संबंधित अधिकारियों को इस निर्देश का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी यह आदेश कर्मचारियों के लिए जिम्मेदारी का नया आयाम है। सभी सरकारी अधिकारी और कर्मचारी अपनी संपत्ति का विवरण मानव संपदा पोर्टल पर समय पर दर्ज कराएं ताकि वे सरकारी नियमों का पालन करते हुए अपने पदोन्नति और अन्य प्रशासनिक लाभों का लाभ उठा सकें। यह कदम भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
