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संसद के बजट सत्र में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पारित

संसद के बजट सत्र के सातवें दिन, राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव बिना प्रधानमंत्री के भाषण के पारित किया गया। यह घटना 22 वर्षों में पहली बार हुई है। अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की गरिमा को बनाए रखने के लिए प्रधानमंत्री से न आने का अनुरोध किया। विपक्षी सांसदों के हंगामे के बीच, सदन की कार्यवाही कई बार स्थगित की गई। जानें इस महत्वपूर्ण घटना के बारे में और अधिक जानकारी।
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संसद के बजट सत्र में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पारित

संसद में बजट सत्र का सातवां दिन


नई दिल्ली: बजट सत्र के सातवें दिन संसद में गतिरोध बना रहा। इस दौरान, प्रधानमंत्री के भाषण के बिना ही लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पारित किया गया। यह घटना 22 वर्षों में पहली बार हुई है, जब राष्ट्रपति के अभिभाषण पर प्रधानमंत्री का जवाब नहीं दिया गया। इससे पहले, 10 जून 2004 को भी ऐसा ही हुआ था जब विपक्ष ने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को बोलने नहीं दिया था।


सदन के इतिहास में अनोखी घटना

गुरुवार को लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी की। अध्यक्ष ओम बिरला ने पहले मिनट में, फिर पांच मिनट में और अंत में दो मिनट में कार्यवाही को स्थगित कर दिया। जब कार्यवाही फिर से शुरू हुई, तो ओम बिरला ने कहा कि बुधवार को जो कुछ हुआ, वह सदन के इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ।


लोकतंत्र की गरिमा का सवाल

ओम बिरला ने कहा कि यदि विपक्षी सांसदों ने प्रधानमंत्री के पास पहुंचकर कोई अप्रत्याशित घटना की होती, तो लोकतंत्र की परंपरा को नुकसान पहुंचता। उन्होंने प्रधानमंत्री से सदन में न आने का अनुरोध किया, जिसे प्रधानमंत्री ने स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि सदन की गरिमा को बनाए रखना आवश्यक है।