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त्रिकालदर्शी भगवान महाकाल ने महाशिवरात्रि के दूसरे दिन पुष्प मुकुट धारण कर भक्तों को दिए दर्शन

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त्रिकालदर्शी भगवान महाकाल ने महाशिवरात्रि के दूसरे दिन पुष्प मुकुट धारण कर भक्तों को दिए दर्शन


त्रिकालदर्शी भगवान महाकाल ने महाशिवरात्रि के दूसरे दिन पुष्प मुकुट धारण कर भक्तों को दिए दर्शन


त्रिकालदर्शी भगवान महाकाल ने महाशिवरात्रि के दूसरे दिन पुष्प मुकुट धारण कर भक्तों को दिए दर्शन


- वर्ष में एक बार दोपहर में होने वाली भस्‍मार्ती देख भक्‍त हुए अभिभूत

उज्जैन, 27 फरवरी (हि.स.)। विश्‍व प्रसिद्ध ज्‍योतिर्लिंग भगवान महाकालेश्‍वर मंदिर में विराजमान भगवान महादेव ने महाशिवरात्रि पर्व के दूसरे दिन गुरुवार को पुष्‍प मुकुट (सेहरा) धारण कर भक्तों को अपने दिव्यरूप में दर्शन दिये। इसके उपरांत वर्ष में एक ही बार महाशिवरात्रि के दूसरे दिन भगवान महाकालेश्वर की दोपहर में भस्मार्ती सम्पन्न हुईं। महाशिवरात्रि पर्व पर दर्शनार्थियों ने लगातार भगवान शिव के दर्शन 44 घण्टे किए।

महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि महाशिवरात्रि पर्व पर महाकालेश्वर मंदिर के पट 25-26 फरवरी की रात 2.30 बजे खुले हुए थे और 27 फरवरी को रात 11 बजे तक शयन आरती तक मंदिर में दर्शन का सिलसिला जारी रहा। इससे पहले महाशिवरात्रि के दूसरे दिन गुरुवार को सुबह भगवान महाकाल ने सवामन पुष्प मुकुट (सेहरा) पहनकर भक्तों को दर्शन दिए। पूर्वाह्न 10:30 बजे के लगभग मुकुट उतारा गया। इसके बाद अपराह्न 12 बजे भगवान महाकालेश्वर की वर्ष में एक बार दोपहर में होने वाली भस्मार्ती प्रारंभ हुई। भस्मार्ती में भक्तों ने ध्यान मग्न होकर भगवान भोले नाथ की आरती का दर्शन लाभ लिया।

महाशिवरात्रि पर्व पर भगवान महाकालेश्वर रात्रि विश्राम नहीं करते है। सम्पूर्ण रात्रि भगवान का परम्परानुसार विशेष महापूजन अभिषेक होता है और इस दौरान सतत 44 घण्टे अपने भक्तों को दर्शन देते है। महाशिवरात्रि पर्व के पूर्व 17 फरवरी से 25 फरवरी तक शिव नवरात्रि से भगवान महाकाल के अलग-अलग रूपों में हजारों भक्तों ने दर्शन लाभ लेकर पुण्य प्राप्त किया। भगवान महाकालेश्वर नित नूतन और अभिनव रूपों में भक्तों को दर्शन देते है। कभी प्राकृतिक रूप में, तो कभी राजसी रूप में आभूषण धारण कर तो कभी भांग, चंदन, सूखे मेवे से तो कभी फल, पुष्प से सजते है। संभवतः विश्व में अकेले श्री महाकालेश्वर भगवान ही है जो इतने रूपों में दर्शन होते है।

महाशिवरात्रि पर्व 26 फरवरी प्रातः 02:30 बजे से 27 फरवरी को दोपहर तक लगभग 06 लाख 01 हजार 663 श्रद्धालुओं ने श्री महाकालेश्वर भगवान के दर्शन किये। एक मार्च को सायं महाकालेश्वर भगवान के पंचमुखारविन्द दर्शन के साथ महाशिवरात्रि पर्व का समापन होगा। महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष एवं जिला कलेक्टर नीरज कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा एवं प्रशासक प्रथम कौशिक ने की गई व्‍यवस्‍थाओं में सहयोग प्रदान करने पर सबका आभार एवं धन्‍यवाद प्रकट किया।

महाशिवरात्रि पर महाकाल मंदिर में रंगोली से बनाई शिव बारात को देशभर में सराहा

महाशिवरात्रि पर श्री महाकालेश्वर मंदिर परिसर में विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन के विद्यार्थियों ने अनवरत 72 घंटे शिव बारात की रंगोली बनाकर किए गए अद्भुत प्रदर्शन को देशभर में सराहा गया। इस पूरे कला प्रदर्शन में विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज ने अथक मेहनत करके विद्यार्थियों द्वारा बनाई गई इस प्रदर्शनी के लिए लगातार प्रेरित किया जाता रहा। इस प्रदर्शन के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विद्यार्थियों की प्रशंसा की है।

विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन के विद्यार्थियों का यह पहला प्रयास नहीं है बल्कि विगत दो वर्षों में इन्होंने देश के विभिन्न प्रमुख आयोजन पर अपना ये प्रदर्शन किया है जिसमें राम मंदिर के शुभारंभ पर जो रांगोली बनाई गई थी उसकी भी देशभर में सराहना हुई थी। कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज के मार्गदर्शन में 23 फरवरी को विश्वविद्यालय की ललित कला अध्ययनशाला के 14 विद्यार्थियों ने 30×40 फीट की शिव बारात की अद्भुत रंगोली 24 घंटे के अथक प्रयासों में बना दी। इस शिव बारात को परंपरागत और आध्यात्मिक वैभव देने के लिए 430 किलोग्राम रंगोली कलर का उपयोग इन विद्यार्थियों ने किया। सबसे पहले इन्होंने आदि देव शिव के प्राचीन वैभव का स्केच धरातल पर उतारा। यह कार्य अक्षित शर्मा ने पूरा किया इसके उपरांत विद्यार्थियों ने अपने क्रिएटिव विजन से कलरफुल इस रंगोली को डिजाइन किया।

शिव बारात रंगोली का प्रदर्शन 23 फरवरी की शाम से लेकर 27 फरवरी की रात्रि तक कुल 72 घंटे से अधिक किया गया। जिसे महाकाल दर्शन के लिए आने वाले दर्शनार्थियों ने देखा और उसकी सराहना की, बल्कि इस रंगोली प्रदर्शन की चर्चा देश भर में विभिन्न माध्यमों के द्वारा की गई और इस प्रशंसनीय कार्य को लेकर मुख्यमंत्री द्वारा भी विद्यार्थियों की सराहना की गई। इस रंगोली की रचना में और इस आकार देने में पंकज सेहरा छात्र ने इसे स्वरूप प्रदान किया और अक्षित शर्मा, मुकुल, जगबंधु महातो, आदित्य चौहान, लक्ष्मी कुशवाह, प्रथा शाक्य, जीत दे, धर्मेंद्र मालवीय, नैसा खान, सलोनी परमार, इशा सोनगरा आदि ने इस रंगोली प्रदर्शन में अपना अथक परिश्रम किया।

हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर