अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में नया मोड़, यूरेनियम भंडार पर सहमति
नई दिल्ली में तनाव के बीच बातचीत का नया चरण
नई दिल्ली: मध्य पूर्व में महीनों से चल रहे तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत ने एक नया मोड़ लिया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ईरान अपने अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम भंडार को छोड़ने के लिए सिद्धांत रूप में सहमत हो गया है। यदि यह समझौता अंतिम रूप लेता है, तो इससे अमेरिका-ईरान संबंधों में सुधार हो सकता है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते सैन्य खतरों को कम करने में मदद मिल सकती है।
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ईरान ने अपने लगभग हथियार-स्तर के संवर्धित यूरेनियम भंडार को छोड़ने पर सहमति जताई है। हालांकि, इसे हटाने की प्रक्रिया पर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। अगले 30 से 60 दिनों में इस पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। यह मुद्दा अब तक दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा विवाद बना हुआ था।
ट्रंप की पहल से बातचीत में तेजी
ट्रंप की पहल से तेज हुई बातचीत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में संकेत दिया था कि वॉशिंगटन और तेहरान एक महत्वपूर्ण समझौते के करीब पहुंच चुके हैं। इस प्रस्तावित डील का उद्देश्य क्षेत्रीय संघर्ष को समाप्त करना और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सामान्य व्यापारिक गतिविधियों को फिर से शुरू करना है। माना जा रहा है कि इसी दबाव के कारण ईरान ने अपने रुख में नरमी दिखाई है।
ईरान के यूरेनियम भंडार की स्थिति
ईरान के पास कितना यूरेनियम?
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के अनुसार, ईरान के पास लगभग 400 किलोग्राम यूरेनियम है, जिसे 60 प्रतिशत तक संवर्धित किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसे आगे शुद्ध करके हथियार बनाने योग्य सामग्री में बदला जा सकता है। इजरायल लंबे समय से इस भंडार को अपने लिए एक बड़ा सुरक्षा खतरा मानता रहा है।
सैन्य कार्रवाई की योजना
सैन्य कार्रवाई की भी बनी थी योजना
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने हाल के दिनों में ईरान के भूमिगत परमाणु भंडार को निशाना बनाने के विकल्पों पर विचार किया था। इस्फहान परमाणु केंद्र के लिए बंकर-बस्टर बमों के उपयोग की चर्चा हुई थी। यहां तक कि अमेरिका और इजरायल की संयुक्त कमांडो कार्रवाई का प्रस्ताव भी सामने आया था, लेकिन जोखिम अधिक होने के कारण इसे मंजूरी नहीं दी गई।
आर्थिक राहत का मुद्दा
आर्थिक राहत भी होगी समझौते का हिस्सा
प्रस्तावित समझौते में ईरान की विदेशों में फंसी अरबों डॉलर की संपत्तियों को जारी करने का मुद्दा भी शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार, पुनर्निर्माण सहायता से जुड़े अधिकांश फंड अंतिम परमाणु समझौते के बाद ही जारी किए जाएंगे। अमेरिका चाहता है कि ईरान लंबे समय तक यूरेनियम संवर्धन को रोक दे, जबकि तेहरान कम अवधि की शर्त पर जोर दे रहा है।
