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दिल्ली में ऐतिहासिक उद्योग भवन का ध्वस्तीकरण: सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत बदलाव

दिल्ली में सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत ऐतिहासिक उद्योग भवन का ध्वस्तीकरण किया जा रहा है। यह इमारत दशकों तक महत्वपूर्ण सरकारी निर्णयों का केंद्र रही है। अधिकारियों का कहना है कि इसका उद्देश्य वीवीआईपी क्षेत्र में यातायात की समस्या को हल करना और सुविधाओं को आधुनिक बनाना है। जानें इस ध्वस्तीकरण के पीछे की वजह और मंत्रालयों का नया ठिकाना क्या है।
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दिल्ली में ऐतिहासिक उद्योग भवन का ध्वस्तीकरण: सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत बदलाव

दिल्ली में ऐतिहासिक इमारत का ध्वस्तीकरण

नई दिल्ली: दिल्ली में अतिक्रमण हटाने के लिए अब तक केवल अवैध कॉलोनियों और झुग्गियों पर कार्रवाई होती रही है। लेकिन अब एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां आजाद भारत की एक महत्वपूर्ण सरकारी इमारत को ध्वस्त किया जा रहा है। यह इमारत, 'उद्योग भवन', दशकों तक देश के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णयों का केंद्र रही है। सेंट्रल विस्टा रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत इसका ध्वस्तीकरण तेजी से किया जा रहा है।


ध्वस्तीकरण का कारण

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि इस इमारत को ध्वस्त करने का मुख्य कारण वीवीआईपी क्षेत्र में बढ़ती यातायात समस्या को हल करना और सुविधाओं को आधुनिक बनाना है। उद्योग भवन को गिराकर यहां एक शानदार ऑफ-रोड पार्किंग सुविधा विकसित की जाएगी, जिससे ट्रैफिक व्यवस्था को सुगम बनाया जा सके।


निर्माण भवन के बाद उद्योग भवन का ध्वस्तीकरण

इससे पहले, इसी साल मई में 'निर्माण भवन' को भी ध्वस्त किया गया था। ये दोनों इमारतें आजादी के बाद, 1956 से 1968 के बीच बनी थीं, ताकि केंद्रीय मंत्रियों के लिए कार्यस्थल उपलब्ध कराया जा सके। अब सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत इन पुरानी इमारतों की जगह नई व्यवस्थाएं स्थापित की जा रही हैं।


मंत्रालयों का नया ठिकाना

इन इमारतों के ध्वस्त होने के बाद, संबंधित मंत्रालयों को उनके नए स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया गया है। अधिकांश मंत्रालयों को 'कर्तव्य भवन-3' और नए 'कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट' (CCS) में भेजा गया है। जिन विभागों को तुरंत स्थानांतरित नहीं किया जा सका, उनके लिए अस्थायी रूप से कस्तूरबा गांधी मार्ग, मिंटो रोड और नेताजी नगर में नई जगहें उपलब्ध कराई गई हैं।