भारत की परमाणु नीति में महत्वपूर्ण बदलाव: नई रिपोर्ट से खुलासा
भारत की परमाणु नीति पर नई रिपोर्ट का प्रभाव
एक नई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट ने भारत की परमाणु नीति को लेकर रणनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) द्वारा जारी की गई इस रिपोर्ट में भारत की परमाणु तैयारियों में महत्वपूर्ण बदलाव का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने पहली बार कुछ परमाणु हथियारों को ऐसी स्थिति में रखा है, जिन्हें ऑपरेशनल तैनाती के रूप में देखा जा सकता है। यह बदलाव भारत की सुरक्षा रणनीति और न्यूक्लियर डिटरेंस क्षमता को नए दृष्टिकोण से देखने का संकेत देता है।
परमाणु नीति में दशकों पुरानी व्यवस्था में बदलाव
SIPRI की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने लंबे समय से एक ऐसी नीति अपनाई है जिसमें परमाणु हथियार और उनके डिलीवरी सिस्टम अलग-अलग स्थानों पर रखे जाते थे। इससे यह सुनिश्चित होता था कि शांति काल में हथियार तुरंत उपयोग के लिए उपलब्ध न हों। हालिया रिपोर्ट में इस व्यवस्था में बदलाव के संकेत मिले हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल ही में 12 परमाणु हथियारों को ऐसे प्लेटफॉर्म्स के साथ जोड़ा गया है, जिन्हें ऑपरेशनल फोर्स का हिस्सा माना जाता है। इस कारण, भारत के परमाणु जखीरे के एक हिस्से को अब केवल भंडारित नहीं, बल्कि तैनात क्षमता के रूप में देखा जा रहा है।
परमाणु पनडुब्बियों पर ध्यान केंद्रित
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारत की रणनीतिक तैयारी केवल भूमि तक सीमित नहीं है। भूमिगत मिसाइल साइलो और बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों (SSBN) के माध्यम से परमाणु क्षमता को और मजबूत किया जा रहा है। SIPRI का कहना है कि कुछ परमाणु हथियारों की तैनाती नई पनडुब्बियों और अन्य लॉन्च प्लेटफॉर्म्स के साथ की गई है। इसके अलावा, समुद्र में डेटरेंस पेट्रोलिंग की गतिविधियों में भी वृद्धि हुई है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी गश्त का उद्देश्य संभावित विरोधियों को यह संदेश देना है कि जवाबी कार्रवाई की क्षमता हमेशा मौजूद है।
भारत का बढ़ता परमाणु जखीरा
रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2026 तक भारत के पास लगभग 190 परमाणु हथियार होने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में थोड़ा अधिक है। SIPRI का कहना है कि भारत लगातार अपने न्यूक्लियर ट्रायड को मजबूत कर रहा है। न्यूक्लियर ट्रायड का मतलब है कि देश के पास हवा, जमीन और समुद्र तीनों माध्यमों से परमाणु हमला करने की क्षमता है। एयरक्राफ्ट, भूमि आधारित मिसाइलें और परमाणु पनडुब्बियां इस ढांचे का हिस्सा हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत मिसाइलों को कैनिस्टर आधारित प्रणाली में रखने और लॉन्च प्लेटफॉर्म्स के साथ जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
नो फर्स्ट यूज नीति के साथ आगे की रणनीति
हालांकि SIPRI की रिपोर्ट में बढ़ती तैयारियों का उल्लेख किया गया है, लेकिन भारत की आधिकारिक परमाणु नीति में कोई बदलाव नहीं आया है। भारत अब भी नो फर्स्ट यूज यानी पहले परमाणु हमला न करने की नीति पर कायम है। इस सिद्धांत के तहत, भारत केवल तब परमाणु हथियारों का उपयोग करेगा जब उस पर या उसकी सेना पर पहले परमाणु हमला किया जाए। भारत की घोषित रणनीति सीमित लेकिन प्रभावी परमाणु क्षमता बनाए रखने की रही है।
