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भारत में एक शिक्षक वाले स्कूलों की चिंताजनक स्थिति

भारत में शिक्षा प्रणाली की स्थिति चिंताजनक है, जहां 7% स्कूल केवल एक शिक्षक पर निर्भर हैं। नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, कई स्कूलों में एक भी छात्र नामांकित नहीं है। जानें किन राज्यों में यह समस्या अधिक गंभीर है और इसके पीछे के कारण क्या हैं।
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भारत में एक शिक्षक वाले स्कूलों की चिंताजनक स्थिति

शिक्षा प्रणाली की वास्तविकता

यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर इंडिया (UDISE+) के अनुसार, देश में 14.71 लाख से अधिक स्कूल हैं, जिनमें से 10.13 लाख सरकारी स्कूल हैं। सरकारी और निजी दोनों प्रकार के स्कूलों में कुल 24.69 करोड़ छात्र शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जबकि इन छात्रों के लिए केवल 1.01 करोड़ शिक्षक उपलब्ध हैं।


एक शिक्षक पर निर्भर 7 प्रतिशत स्कूल

नीति आयोग की रिपोर्ट 'स्कूल एजुकेशन सिस्टम इन इंडिया' में बताया गया है कि 7 प्रतिशत स्कूल ऐसे हैं, जहां केवल एक शिक्षक पर निर्भरता है। ये स्कूल देश के दूरदराज और कम जनसंख्या वाले क्षेत्रों में स्थित हैं।


एक शिक्षक की कई जिम्मेदारियां

इन 7 प्रतिशत स्कूलों में एकमात्र शिक्षक को कई कार्यों का निर्वहन करना पड़ता है, जैसे कि विभिन्न कक्षाओं को पढ़ाना, प्रशासनिक कार्य, मिड-डे मील की व्यवस्था, रिकॉर्ड रखना और अभिभावकों से संवाद करना। अधिकांश स्कूलों में मल्टी-ग्रेड क्लासरूम होते हैं, जिससे शिक्षक का ध्यान बंट जाता है।


भारत में एक शिक्षक वाले स्कूलों की चिंताजनक स्थिति


शून्य नामांकन वाले स्कूल

UDISE+ की रिपोर्ट के अनुसार, देश में 7,993 स्कूल ऐसे हैं जिनमें कोई भी छात्र नामांकित नहीं है। इन स्कूलों में 20,817 शिक्षक तैनात हैं, जो बिना काम के वेतन प्राप्त कर रहे हैं। एक शिक्षक वाले स्कूलों की कुल संख्या 1,04,125 है, जहां लगभग 33,76,769 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं।


राज्यवार स्थिति

कुछ राज्यों में शून्य नामांकन वाले स्कूलों की संख्या इस प्रकार है:



  • पश्चिम बंगाल: 3,812 स्कूल

  • तेलंगाना: 2,245 स्कूल

  • मध्य प्रदेश: 463 स्कूल

  • तमिलनाडु: 311 स्कूल

  • कर्नाटक: 270 स्कूल

  • राजस्थान: 215 स्कूल

  • जम्मू-कश्मीर: 146 स्कूल

  • झारखंड: 107 स्कूल

  • उत्तर प्रदेश: 81 स्कूल

  • मेघालय: 74 स्कूल

  • गुजरात: 63 स्कूल

  • केरल: 47 स्कूल

  • उत्तराखंड: 39 स्कूल

  • मणिपुर: 35 स्कूल

  • मिजोरम: 32 स्कूल

  • अरुणाचल प्रदेश: 21 स्कूल

  • पंजाब: 13 स्कूल

  • लद्दाख: 10 स्कूल

  • बिहार: 5 स्कूल

  • ओडिशा: 3 स्कूल

  • आंध्र प्रदेश: 1 स्कूल


शून्य नामांकन वाले स्कूलों की अनुपस्थिति

कुछ राज्यों में एक भी शून्य नामांकन वाला स्कूल नहीं है, जैसे असम, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, दादरा और नगर हवेली, दिल्ली, गोवा, हरियाणा, लक्षद्वीप, महाराष्ट्र, नागालैंड, पुडुचेरी, सिक्किम और त्रिपुरा।


पश्चिम बंगाल में शिक्षा की स्थिति

UDISE+ के आंकड़ों के अनुसार, देश में 7,993 स्कूल हैं जिनमें कोई छात्र नहीं है, जिनमें से अकेले पश्चिम बंगाल में 3,812 स्कूल हैं। तेलंगाना में यह संख्या 2,245 है। इन दोनों राज्यों में मिलाकर, देश के लगभग 76% शून्य नामांकन वाले स्कूल स्थित हैं।


एक शिक्षक वाले स्कूलों की संख्या

कुछ राज्यों में एक शिक्षक वाले स्कूलों की संख्या इस प्रकार है:



  • उत्तर प्रदेश: 9,508 एक शिक्षक वाले स्कूल, 6,24,327 छात्र

  • झारखंड: 9,172 एक शिक्षक वाले स्कूल, 4,36,480 छात्र

  • मध्य प्रदेश: 7,217 स्कूल, 2,29,095 छात्र

  • महाराष्ट्र: 8,152 स्कूल, 1,50,146 छात्र

  • आंध्र प्रदेश: 12,912 स्कूल, 1,97,113 छात्र

  • छत्तीसगढ़: 5,973 स्कूल, 2,13,237 छात्र

  • पश्चिम बंगाल: 6,482 स्कूल, 2,35,494 छात्र

  • तेलंगाना: 5,001 स्कूल, 62,288 छात्र