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उत्तर प्रदेश में सीएमओ के तबादले की सूची जल्द जारी होगी

उत्तर प्रदेश में मुख्य चिकित्साधिकारियों (सीएमओ) के तबादले की सूची जल्द ही जारी होने वाली है, जिसमें लगभग 25 से 30 सीएमओ के तबादले होंगे। इस बार स्वास्थ्य मंत्री द्वारा तबादले किए जाएंगे, और जनप्रतिनिधियों की पैरवी को भी महत्व दिया जाएगा। दवा माफिया की सक्रियता के बीच, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वरिष्ठता को प्राथमिकता दी जाएगी या माफियाओं का प्रभाव अधिक रहेगा। अगले हफ्ते तक इस सूची के आने की उम्मीद है।
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उत्तर प्रदेश में सीएमओ के तबादले की सूची जल्द जारी होगी

मुख्य चिकित्साधिकारियों के तबादले की तैयारी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मुख्य चिकित्साधिकारियों (सीएमओ) के तबादले की बहुप्रतीक्षित सूची जल्द ही जारी होने वाली है। प्रदेश में लगभग 25 से 30 सीएमओ के तबादले होने की संभावना है। इस संदर्भ में संभावित डॉक्टरों के नामों की सूची भी तैयार की जा रही है। सीएमओ के तबादले को लेकर विभिन्न चर्चाएं चल रही हैं। कहा जा रहा है कि इस बार सीएमओ के तबादले स्वास्थ्य मंत्री द्वारा किए जाएंगे, जिससे डॉक्टरों की वरिष्ठता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। हालांकि, दवा माफिया भी इस प्रक्रिया में सक्रिय हो गए हैं और अपने करीबी डॉक्टरों को सीएमओ बनाने के लिए प्रयासरत हैं। अब यह देखना होगा कि क्या इस बार वरिष्ठता को प्राथमिकता दी जाएगी या दवा माफियाओं का प्रभाव अधिक रहेगा।


जनप्रतिनिधियों की भूमिका
सूत्रों के अनुसार, इस बार स्वास्थ्य मंत्री के हस्ताक्षर से सीएमओ के तबादले किए जाएंगे। जनप्रतिनिधियों द्वारा की गई पैरवी और उनके पत्रों को भी इस बार महत्व दिया जाएगा। पहले, सीएमओ के तबादले में न तो मंत्री की बात मानी जाती थी और न ही किसी जनप्रतिनिधि की। तबादले केवल दवा माफियाओं के इशारों पर होते थे।


वरियता पर ध्यान
इस बार सीएमओ के तबादले में वरिष्ठता को प्राथमिकता दी जाएगी। सूत्रों का कहना है कि इस बार इस बात का खास ध्यान रखा जा रहा है। हालांकि, दवा माफियाओं में थोड़ी बेचैनी है, लेकिन वे अपने करीबी डॉक्टरों के नाम ट्रांसफर सूची में शामिल कराने के लिए प्रयासरत हैं।


सूची अगले हफ्ते जारी होगी
सीएमओ के तबादले की सूची अगले हफ्ते तक जारी होने की उम्मीद है। लंबे समय बाद प्रदेश में बड़ी संख्या में सीएमओ के तबादले होने जा रहे हैं। पिछले साल भी सीएमओ के कुछ तबादले हुए थे। कई जिलों में एसीएमओ ही चार्ज संभाल रहे हैं, जबकि कुछ जिलों में एक ही सीएमओ तीन साल से अधिक समय से तैनात हैं।