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ममता बनर्जी का चुनाव आयोग पर हमला: क्या बंगाल की लोकतांत्रिक प्रक्रिया खतरे में है?

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि SIR अभियान का उपयोग राज्य को परेशान करने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इसे 'व्हाट्सएप पर चलने' जैसा बताया। ममता ने आरोप लगाया कि मतदाता सूचियों से नाम हटाए जा रहे हैं और बुजुर्गों तथा गर्भवती महिलाओं को अमानवीय तरीके से बुलाया जा रहा है। उनके इस बयान से चुनाव आयोग और तृणमूल कांग्रेस के बीच टकराव की संभावना बढ़ गई है। जानें इस मुद्दे पर ममता के विचार और बंगाल की राजनीतिक स्थिति।
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ममता बनर्जी का चुनाव आयोग पर हमला: क्या बंगाल की लोकतांत्रिक प्रक्रिया खतरे में है?

मुख्यमंत्री का तीखा बयान


नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान को लेकर भारतीय चुनाव आयोग (ECI) पर कड़ा हमला किया है। उन्होंने आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव आयोग अब 'व्हाट्सएप पर' काम कर रहा है। यह टिप्पणी उन्होंने गंगासागर में एक जनसभा के दौरान की, जहां उन्होंने मुरीगंगा नदी पर प्रस्तावित गंगानगर सेतु की आधारशिला रखी।


SIR अभियान पर ममता का बड़ा आरोप

मुख्यमंत्री ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया का उपयोग बंगाल को परेशान करने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने चिंता जताई कि जिस संवैधानिक संस्था पर लोकतंत्र की नींव टिकी है, वह इस तरह से कार्य कर रही है। ममता ने चेतावनी दी कि अगर यह स्थिति बनी रही, तो एक दिन चुनाव आयोग 'गायब' हो सकता है।


अभिषेक बनर्जी के आरोपों का समर्थन

ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के पूर्व में किए गए बयानों का हवाला देते हुए चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि SIR प्रक्रिया के दौरान कई लोगों की जान गई, कुछ अस्पताल में भर्ती हुए और कई बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) पर इतना मानसिक दबाव था कि उन्होंने आत्महत्या का प्रयास किया। ममता ने सवाल उठाया कि इन गंभीर आरोपों के बावजूद चुनाव आयोग ने संतोषजनक उत्तर क्यों नहीं दिया।


मतदाता सूची से नाम हटाने का आरोप

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि मतदाता सूचियों से मनमाने ढंग से नाम हटाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि 85 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों को सत्यापन के लिए बुलाया जा रहा है, जिनमें से कुछ ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं। इसके अलावा, गर्भवती महिलाओं को भी बुलाए जाने का दावा करते हुए इसे अमानवीय करार दिया। ममता ने यह भी सवाल किया कि दशकों से इस देश में रहने वाले लोगों को बार-बार यह साबित करने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है कि वे नागरिक और मतदाता हैं।


बंगाल कभी नहीं झुकेगा

अपने भाषण में ममता बनर्जी ने स्पष्ट कहा कि बंगाल कभी भी किसी दबाव के आगे नहीं झुका है और न ही झुकेगा। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए उनकी सरकार और पार्टी पूरी मजबूती से खड़ी रहेगी। ममता ने इसे बंगाल की अस्मिता और स्वाभिमान से जुड़ा मुद्दा बताया।


बंगाल की बहुलवादी पहचान पर जोर

मुख्यमंत्री ने बंगाल की सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि बंगाल वह भूमि है जहां लोग मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारे सभी में समान श्रद्धा से जाते हैं। यही बंगाल की पहचान है। ममता ने चेतावनी दी कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएंगे, कुछ ताकतें जानबूझकर अशांति फैलाने और झूठे मुद्दे उठाने की कोशिश करेंगी।


चुनाव से पहले बढ़ता सियासी टकराव

ममता बनर्जी के इस बयान से स्पष्ट है कि आने वाले समय में चुनाव आयोग और तृणमूल कांग्रेस के बीच टकराव और बढ़ सकता है। SIR अभियान को लेकर उठे सवाल अब केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि बड़े राजनीतिक मुद्दे का रूप ले चुके हैं। मुख्यमंत्री के तेवर बताते हैं कि बंगाल में आगामी चुनावों से पहले सियासी माहौल और गरमाने वाला है।