संसद में हंगामे का नया अध्याय: क्या है विपक्ष की असली मंशा?
संसद में गतिरोध का नया मोड़
आज संसद में चल रहे गतिरोध ने एक नया मोड़ लिया, जब भारी हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही को पूरे दिन के लिए स्थगित करना पड़ा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का उत्तर देना था, लेकिन विपक्ष के तीव्र विरोध के चलते सदन की कार्यवाही बाधित हुई। इसके परिणामस्वरूप, पीठासीन अधिकारी संध्या राय को सदन स्थगित करने की घोषणा करनी पड़ी, जिससे प्रधानमंत्री का महत्वपूर्ण संबोधन भी टल गया।
विपक्ष पर गंभीर आरोप
विपक्ष की मंशा हमला करने की...
सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद, भारतीय जनता पार्टी और एनडीए के सहयोगियों ने विपक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं। भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने कहा कि विपक्ष की मंशा केवल विरोध तक सीमित नहीं थी, बल्कि उनकी महिला सदस्यों ने प्रधानमंत्री की कुर्सी का घेराव किया और उनके हाव-भाव 'हमले' जैसे प्रतीत हो रहे थे.
विपक्षी सांसदों का प्रदर्शन
#WATCH दिल्ली: भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने सदन की कार्यवाही में हंगामे पर कहा, "आज जो हुआ उसकी तस्वीर देखकर आप हैरान रह जाएंगे... यह स्थिति कहती है कि जनता इन्हें(कांग्रेस) हरा रही है तो ये सदन में हमें(भाजपा) बोलने नहीं देंगे। देश को इतना बड़ा गौरव प्राप्त हुआ है लेकिन तब भी वे… pic.twitter.com/A3KS4S0WB2
— News Media (@AHindinews) February 4, 2026
तिवारी के अनुसार, वरिष्ठ मंत्रियों के समझाने के बावजूद विपक्षी सांसद पीछे हटने को तैयार नहीं थे। इसी क्रम में एलजेपीआर सांसद राजेश वर्मा ने आरोप लगाया कि विपक्षी सांसद सदन के भीतर बैनर-पोस्टर लेकर इस तरह दौड़ रहे थे मानो वे सड़क पर हों। उनके मुताबिक, विपक्षी महिला सांसद प्रधानमंत्री के बैठने के स्थान से मात्र दो कतार पीछे तक पहुँच गई थीं, जिससे हाथापाई जैसी असहज स्थिति उत्पन्न हो गई थी.
कांग्रेस का स्पष्टीकरण
PM मोदी नहीं, निशिकांत दुबे की ओर बढ़ रहे थे...
कांग्रेस की महिला सांसदों ने अपनी बात रखते हुए घटना को अलग नजरिए से पेश किया है। कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड़ ने स्पष्ट किया कि वे और उनके साथी प्रधानमंत्री की ओर नहीं, बल्कि भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की ओर बढ़े थे। विपक्ष का आरोप है कि वे निशिकांत दुबे द्वारा महिलाओं के संबंध में की गई किसी टिप्पणी का विरोध कर रहे थे.
गायकवाड़ के अनुसार, जब उन्होंने दुबे से जवाब मांगा, तो वे वहां से जाने लगे। हालांकि, सदन स्थगित होने के बाद भी वेल में काफी तनाव बना रहा, जहां विपक्षी सांसद पोस्टर लेकर डटे रहे और किरेन रिजिजू तथा अश्विनी वैष्णव जैसे मंत्री उन्हें समझाने की कोशिश करते दिखे। अंततः दीपेंद्र हुड्डा के हस्तक्षेप के बाद विपक्षी सदस्य वापस लौटे, लेकिन इस घटना ने सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच की वैचारिक खाई को और गहरा कर दिया है.
