Newzfatafatlogo

पश्चिम बंगाल की राजनीति में कल्याण बनर्जी का बड़ा बयान: पुलिस को राजनीतिक दबाव से मुक्त रहने की सलाह

पश्चिम बंगाल की राजनीति में कल्याण बनर्जी ने पुलिस को राजनीतिक दबाव से मुक्त रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि पुलिस को निष्पक्षता से कानून का पालन करना चाहिए। इस बयान के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है, खासकर काकोली घोष की पद से हटाने और उनकी सुरक्षा बढ़ाने के संदर्भ में। ममता बनर्जी ने भी पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल उठाए हैं। जानें इस राजनीतिक घटनाक्रम के सभी पहलुओं के बारे में।
 | 
पश्चिम बंगाल की राजनीति में कल्याण बनर्जी का बड़ा बयान: पुलिस को राजनीतिक दबाव से मुक्त रहने की सलाह

कोलकाता: बयानबाजी का नया दौर


कोलकता: पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति में एक बार फिर से बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में पार्टी के चीफ व्हिप, कल्याण बनर्जी ने राज्य पुलिस के संबंध में एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस को किसी भी राजनीतिक नेता, जिसमें सुवेंदु अधिकारी भी शामिल हैं, के प्रभाव में आकर कार्य नहीं करना चाहिए और उन्हें कानून का पालन पूरी निष्पक्षता से करना चाहिए।


पुलिस को निष्पक्षता की सलाह

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में, कल्याण बनर्जी ने कहा कि उन्हें पुलिसकर्मियों के प्रति गहरा सम्मान है, खासकर क्योंकि वह खुद एक पुलिस अधिकारी के बेटे हैं। हालांकि, उन्होंने उन्हें याद दिलाया कि उनका कर्तव्य ईमानदारी और निष्पक्षता के साथ कानून का पालन करवाना है, न कि किसी राजनीतिक नेता के प्रभाव में आकर। पुलिस को पूर्वाग्रह, भेदभाव या राजनीतिक रंग के बिना लोगों की सेवा करनी चाहिए और केवल न्याय और संविधान के प्रति समर्पित रहना चाहिए। उनके इस बयान ने बंगाल की राजनीति में नई बहस को जन्म दिया है।


चीफ व्हिप के रूप में वापसी

हाल ही में, तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने काकोली घोष को लोकसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक पद से हटा दिया और कल्याण बनर्जी को फिर से यह जिम्मेदारी सौंपी। काकोली घोष को पिछले साल अगस्त में यह पद मिला था, जब कल्याण ने इस्तीफा दिया था। अब, लगभग नौ महीने बाद, उन्हें यह जिम्मेदारी वापस दी गई है।


सोशल मीडिया पर नाराजगी का इजहार

काकोली घोष ने पद से हटाए जाने के बाद सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने लिखा, '1976 से जान-पहचान, 1984 से सफर। आज मुझे चार दशकों की वफादारी का इनाम मिला है।' उनकी इस टिप्पणी ने पार्टी के भीतर और बाहर सियासी हलचल को तेज कर दिया। यह माना जा रहा है कि वह इस निर्णय से काफी नाराज थीं।


काकोली घोष की सुरक्षा में वृद्धि

इस बीच, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने तृणमूल सांसद काकोली घोष दस्तीदार की सुरक्षा को बढ़ाकर वाई-प्लस कर दिया है। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब अभिषेक बनर्जी समेत कई बड़े तृणमूल नेताओं की सुरक्षा में कटौती की खबरें आ रही हैं।


ममता बनर्जी का पुलिस पर सवाल

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को भारी हार का सामना करना पड़ा, जबकि भाजपा ने पहली बार राज्य में सरकार बनाई और सुवेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री बने। इसके बाद, ममता बनर्जी ने कलकत्ता हाई कोर्ट में कहा कि विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा के दौरान पुलिस निष्क्रिय रही। उन्होंने राज्य में चल रहे बुलडोजर अभियान पर भी टिप्पणी की और कहा कि यह (बंगाल) बुलडोजर राज्य नहीं है।


ममता बनर्जी चुनाव परिणामों के बाद तृणमूल कार्यकर्ताओं के खिलाफ कथित हिंसा और पार्टी कार्यालयों पर हमलों से जुड़े मामलों में अदालत में अपनी दलीलें पेश करने पहुंची थीं।