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पश्चिम बंगाल में सीआईडी की छापेमारी, ममता बनर्जी के कार्यालय में विवाद

पश्चिम बंगाल में सीआईडी की टीम ने ममता बनर्जी के कार्यालय में छापेमारी की, जहां तृणमूल कांग्रेस के पूर्व राज्यसभा सदस्य सुभाषिश चक्रवर्ती ने अधिकारियों को रोकने की कोशिश की। यह घटनाक्रम तब हुआ जब ममता और अभिषेक बनर्जी नई दिल्ली में थे। जानें इस विवाद के पीछे की पूरी कहानी और क्या है सीआईडी की जांच का कारण।
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पश्चिम बंगाल में सीआईडी की छापेमारी, ममता बनर्जी के कार्यालय में विवाद

सीआईडी की छापेमारी का घटनाक्रम

कोलकाता - पश्चिम बंगाल पुलिस के आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) की एक टीम ने मंगलवार को कोलकाता के कालीघाट में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निवास के निकट तृणमूल कांग्रेस के कार्यालय में छापेमारी की।


हालांकि, तृणमूल कांग्रेस के पूर्व राज्यसभा सदस्य सुभाषिश चक्रवर्ती ने सीआईडी टीम को कार्यालय के प्रवेश द्वार पर रोक दिया। उन्होंने अधिकारियों के साथ तीखी बहस की और कहा कि चूंकि ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी दोनों कोलकाता में नहीं हैं, इसलिए वे सीआईडी को परिसर में प्रवेश नहीं करने देंगे। सीआईडी अधिकारियों ने उन्हें बताया कि वे कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई करने आए हैं, लेकिन चक्रवर्ती ने बहस जारी रखी।


सीआईडी अधिकारियों ने चक्रवर्ती को समझाया कि वे अपना कर्तव्य निभाने आए हैं। एक अधिकारी ने उनसे पूछा, "क्या आप हमें अपने कर्तव्य से रोक रहे हैं?" इस पर चक्रवर्ती ने कहा, "मैं आपको रोक नहीं रहा, लेकिन मैंने आपको अपनी स्थिति से अवगत कराया है।" इस बीच, मौके पर मौजूद सीआईडी अधिकारी अपने उच्च अधिकारियों के निर्देशों की प्रतीक्षा कर रहे थे।


केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के कुछ जवान भी घटनास्थल पर पहुंच चुके थे। संयोगवश, अभिषेक बनर्जी को उसी दिन शाम 5 बजे सीआईडी कार्यालय में तृणमूल कांग्रेस के कुछ विधायकों के हस्ताक्षरों के मिलान में गड़बड़ी के मामले में पूछताछ के लिए पेश होना था। यह अभिषेक बनर्जी को जारी किया गया तीसरा नोटिस है। रिपोर्टों के अनुसार, ममता और अभिषेक बनर्जी इस समय नई दिल्ली में हैं, जहां उन्होंने विपक्षी इंडिया गठबंधन की एक महत्वपूर्ण बैठक में भाग लिया।