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सुवेंदु अधिकारी की सरकार के निर्णय: शिक्षा से लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा तक

सुवेंदु अधिकारी की सरकार ने पश्चिम बंगाल में शिक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। 'वंदे मातरम' का गाना सभी शिक्षण संस्थानों में अनिवार्य किया गया है, जबकि घुसपैठियों की पहचान और उन्हें बाहर निकालने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। इसके अलावा, पशु वध पर नियंत्रण के लिए सख्त कानून लागू किया गया है। जानें इन निर्णयों का बंगाल की संस्कृति और समाज पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
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सुवेंदु अधिकारी की सरकार के निर्णय: शिक्षा से लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा तक

सुवेंदु अधिकारी की नई नीतियाँ

सुवेंदु अधिकारी की सरकार ने सभी शैक्षणिक संस्थानों, जिसमें मदरसे भी शामिल हैं, में ‘वंदे मातरम’ का गाना अनिवार्य कर दिया है। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि ‘वंदे मातरम’ एक धार्मिक गीत नहीं है, और यदि इसमें कुछ धार्मिक संदर्भ हैं, तो वे बंगाल की सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े हैं। बंकिम चंद्र चटोपाध्याय बांग्ला संस्कृति के प्रतीक थे। उनकी रचना का हर शिक्षण संस्थान में गाया जाना और युवा पीढ़ी को इसकी जानकारी देना बंगाल के सांस्कृतिक पुनर्जागरण के लिए महत्वपूर्ण है।


भारतीय जनता पार्टी ने जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाग लिया, तो उसने दो प्रमुख बातें स्पष्ट की थीं। पहली यह कि यह चुनाव सामान्य नहीं है और इसे किसी अन्य राज्य के चुनाव के रूप में नहीं देखा जा सकता। भाजपा ने इसे एक वैचारिक संघर्ष बताया। दूसरी बात यह थी कि यह चुनाव राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित है। इस प्रकार, पश्चिम बंगाल चुनाव का मुख्य नैरेटिव हिंदुत्व और राष्ट्रीय सुरक्षा पर केंद्रित था। इसके चारों ओर अन्य नैरेटिव तैयार किए गए और जीतने की रणनीतियाँ बनाई गईं। इसलिए जब भाजपा ने चुनाव जीता, तो उसे पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के कदम उठाने थे।


यह कहना गलत नहीं होगा कि शपथ लेने के दो सप्ताह के भीतर, सुवेंदु अधिकारी की सरकार ने इन दोनों महत्वपूर्ण मुद्दों पर निर्णायक कदम उठाए हैं। वैचारिक प्रतिबद्धता से जुड़े निर्णय लेने के बाद ही सुवेंदु दिल्ली की पहली यात्रा पर गए। प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री से मिलकर उन्होंने अपनी सरकार के प्रारंभिक निर्णयों की जानकारी दी। इन मुलाकातों में वे आत्मविश्वास से भरे नजर आए और यह भी स्पष्ट था कि दोनों शीर्ष नेताओं का उनके प्रति समर्थन था।


राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित निर्णयों की बात करें तो, सरकार गठन के बाद पहली कैबिनेट बैठक में बांग्लादेश से लगती सीमा पर बाड़ लगाने के लिए सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को भूमि देने का निर्णय लिया गया। इसके बाद, चिकन नेक क्षेत्र को भी बीएसएफ के हवाले किया गया। यह क्षेत्र पूर्वोत्तर के सभी हिस्सों को भारत के अन्य हिस्सों से काटने की साजिश का केंद्र रहा है। केंद्र सरकार इसे प्राथमिकता में रखती है। हाल ही में, सिलिगुड़ी में एक एक्सप्रेस वे का उद्घाटन हुआ, जहां प्रधानमंत्री ने सेना के जहाज से उतरकर बुनियादी ढांचे को मजबूत करने का संकेत दिया।


सुवेंदु अधिकारी की सरकार ने वैचारिक मुद्दों पर भी त्वरित निर्णय लेने की आवश्यकता महसूस की। चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा ने वादा किया था कि वह बहुसंख्यक हिंदुओं को अल्पसंख्यक की तरह जीने के लिए मजबूर नहीं करेगी। यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा था, जिसने लोगों के मन में गहरी छाप छोड़ी। सुवेंदु अधिकारी ने सरकार में आते ही सड़कों पर नमाज पढ़ने पर रोक लगा दी है, जिससे बहुसंख्यक हिंदू आबादी में सुरक्षा की भावना बढ़ी है।


घुसपैठियों की पहचान और उन्हें सीमा सुरक्षा बल को सौंपने का निर्णय भी लिया गया है। ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ का सिद्धांत लागू किया जा रहा है। इसके तहत, घुसपैठियों की पहचान की जाएगी और उन्हें भारत से बाहर निकाला जाएगा। इसके साथ ही, सुवेंदु अधिकारी ने संशोधित नागरिकता कानून को लागू करने की घोषणा की है, जिससे धार्मिक प्रताड़ना झेलकर भारत आए गैर-मुस्लिमों को नागरिकता दी जाएगी।


सुवेंदु अधिकारी ने पशु वध पर नियंत्रण के लिए ‘वेस्ट बंगाल एनिमल स्लॉटर कंट्रोल एक्ट 1950’ को सख्ती से लागू किया है। इसके तहत, बिना प्रमाणपत्र के किसी भी पशु का वध नहीं किया जा सकता है। इस कानून के तहत, केवल उन पशुओं का वध किया जाएगा जो काम के नहीं हैं या बीमार हैं। इस निर्णय से पश्चिम बंगाल के कई क्षेत्रों में खुले में पशु वध बंद हो गया है, जो धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से संतोषजनक है।


इस प्रकार, सुवेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल में बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाए हैं और केंद्र तथा राज्य के बीच समन्वय स्थापित किया है। यह स्पष्ट है कि भाजपा अपने वादों को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।