एपीएफआरए 1978 के समर्थन में राज्य के कई जिलो शांतिपूर्ण रैली आयोजित
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इटानगर, 27 फरवरी (हि.स.)। अरुणाचल प्रदेश की स्वदेशी आस्था और सांस्कृतिक सोसायटी
(आईएफसीएसएपी), लोअर दिबांग वैल्ली, अपर सुबनसिरी, लोअर सियांग, जिला इकाई ने आज अरुणाचल प्रदेश धर्म की स्वतंत्रता अधिनियम
(एपीएफआरए), 1978 के समर्थन में संबंधित जिले के विभिन्न स्थानों पर एक
शांतिपूर्ण रैली का आयोजन किया।
रैली में संबंधित
जिलों के आदि, गालो, तागिन और इदु मिश्मी जैसे कई सौ स्वदेशी समुदायों के
सदस्यों की उत्साही भागीदारी देखी गई और राज्य सरकार से एपीएफआरए 1978 को पूरी तरह से उचित कार्यान्वयन के तहत लागू करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि हम एपीएफआरए, 1978 का समर्थन करते हैं, अधिनियम को तत्काल लागू करें। उन्होंने कहा कि अगर संस्कृति खो जाती है तो
पहचान खो जाती है, आदि के नारे के साथ रैली में हिस्सा लिया।
मीडिया से बात
करते हुए आईएफसीएसएपी के एक प्रतिनिधि ने कहा कि 46 साल पहले अधिनियमित होने के बावजूद एपीएफआरए को लागू नही किया गया। अरुणाचल प्रदेश सरकार ने
अभी तक अधिनियमित, 1978 को पूरी तरह से लागू नहीं किया है, जिसे राज्य की स्वदेशी आस्था, संस्कृति और परंपराओं की रक्षा के लिए पारित किया गया था। यह
सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि अधिनियम हमारी समृद्ध विरासत को संरक्षित करने के
अपने इच्छित उद्देश्य को पूरा करे।
उन्होंने कहा कि हम किसी भी धर्म के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन हम सिर्फ अपने राज्य की बहुमूल्य रीति-रिवाजों और संस्कृति में मिलावट
को रोकना चाहते हैं। रैली का उद्देश्य स्वदेशी धार्मिक प्रथाओं को बाहरी प्रभावों
से बचाने के महत्व को उजागर करना था और सरकार से अधिनियम के प्रावधानों को लागू
करने के लिए तत्काल कदम उठाने का आह्वान किया।
प्रतिभागियों ने
कानून की भावना को बनाए रखने और अरुणाचल प्रदेश की स्वदेशी परंपराओं को कमजोर करने
वाली किसी भी गतिविधि को रोकने के लिए कानूनी और प्रशासनिक उपायों की आवश्यकता पर
जोर दिया।
हिन्दुस्थान समाचार / तागू निन्गी