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एमजीसीयू में दिव्यांगता अध्ययन पर राष्ट्रीय सम्मेलन

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एमजीसीयू में दिव्यांगता अध्ययन पर राष्ट्रीय सम्मेलन


पूर्वी चंपारण,27 फ़रवरी (हि.स.)।महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय दिव्यांगजन प्रकोष्ठ व अंग्रेजी विभाग के परस्पर सहयोग से दिव्यांगता पर अध्ययन विषयक एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन गुरुवार को मोतिहारी के होटल रुद्र रीजेंसी किया गया। सम्मेलन का उद्देश्य दिव्यांगता से संबंधित उभरते विमर्श को उजागर करना था।सम्मेलन में विशेषज्ञों ने इस महत्वपूर्ण विषय के विभिन्न पहलुओं पर विचार साझा किए।

आयोजन के मुख्य संरक्षक कुलपति प्रो.संजीव कुमार ने दिव्यांगता के मूलभूत सिद्धांतों पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रारंभ की गई विभिन्न दिव्यांग योजना पर चर्चा की। इस अवसर पर स्कूल ऑफ ह्यूमैनिटीज एंड लैंग्वेजेज़ के डीन, प्रो. प्रसून दत्त सिंह भीउपस्थित थे।

मुख्य वक्ता दिल्ली विश्वविद्यालय के अंग्रेज़ी विभाग के प्रो. उज्जवल जना ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए दिव्यांगता की अवधारणा के ऐतिहासिक मूल को समझाया। उन्होंने बताया कि प्राचीन समय में दिव्यांगता को अक्सर अभिशाप या दंड के रूप में देखा जाता था, जिससे समाज में दिव्यांग व्यक्तियों के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण विकसित हुआ। प्रो. जना ने विचारोत्तेजक व्याख्यान से दिव्यांगता की समझ में सांस्कृतिक और दार्शनिक बदलावों को रेखांकित किया। सम्मेलन में दिव्यांगता अध्ययन को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने पर जोर दिया, ताकि एक समावेशी, समानता पर आधारित और बाधारहित वातावरण तैयार किया जा सके।

वक्ताओं ने विभिन्न साहित्यिक और काल्पनिक पात्रों पर चर्चा की, जैसे फिल्म शोले के ठाकुर और साजन के सागर, जिन्हें उनकी दिव्यांगता के कारण हाशिए पर रखा गया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इन पात्रों को केंद्र में लाकर समाज में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है।सम्मेलन के दौरान करीब 30 से अधिक शोधकर्ताओं ने अपने महत्वपूर्ण शोध प्रस्तुत किए।

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हिन्दुस्थान समाचार / आनंद कुमार