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एनएसयूआई ने यूजीसी ड्राफ्ट का किया विरोध, शिक्षा प्रणाली में निजीकरण व कॉर्पोरेट नियंत्रण का लगाया आरोप

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एनएसयूआई ने यूजीसी ड्राफ्ट का किया विरोध, शिक्षा प्रणाली में निजीकरण व कॉर्पोरेट नियंत्रण का लगाया आरोप


जगदलपुर, 27 फ़रवरी (हि.स.)। बस्तर जिले के शासकीय काकतीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय जगदलपुर में छात्रों ने यूजीसी ड्राफ्ट रेगुलेशन 2025 के खिलाफ आज गुरुवार काे पर्चा बाटकर विरोध किया। एनएसयूआई प्रदेश प्रभारी आकाश चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडेय के निर्देश पर जिला अध्यक्ष विशाल खम्बारी के नेतृत्व मे पर्चे बांटकर इस ड्राफ्ट के खतरनाक परिणामों के बारे में छात्र-छात्राओं को अवगत कराया गया।

यूजीसी ड्राफ्ट रेगुलेशन 2025 में प्रस्तावित नीतियों को लेकर छात्रों का कहना है कि यह शिक्षा प्रणाली के निजीकरण और कॉर्पोरेट नियंत्रण को बढ़ावा देने की एक साजिश है। छात्रों ने विशेष रूप से प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस नामक प्रावधान पर विरोध जताया, जिसके तहत बिना किसी शैक्षणिक और शोध अनुभव वाले व्यक्ति को विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर नियुक्त किया जा सकता है। इसका सीधा मतलब यह है कि गरीब और वंचित वर्गों के छात्रों को उनके वर्षों की मेहनत के बावजूद बिना किसी पारदर्शिता और मेरिट के बाहर किया जा सकता है। साथ ही आरक्षण नियमों की अनदेखी करने से यह शिक्षा प्रणाली और भी असमान हो जाएगी, जो पहले से ही कमजोर वर्गों के लिए संघर्ष का कारण बन रही है। इसके अलावा, छात्र इस बात को लेकर भी चिंतित हैं कि ड्राफ्ट के तहत कुलपति की नियुक्ति में राज्य सरकार की भूमिका को समाप्त कर दिया गया है, जिससे केवल गवर्नर के अधीन नियुक्तियां होंगी। इस प्रकार, विश्वविद्यालयों का नियंत्रण अब कॉर्पोरेट सेक्टर के हाथों में जा सकता है, जो शिक्षा के उद्देश्यों से अधिक अपने राजनीतिक और व्यावसायिक हितों को बढ़ावा देंगे।

यूजीसी केयर लिस्ट के खत्म करने के फैसले को भी छात्रों ने नकारात्मक बताया है, क्योंकि इससे अच्छे शोध पत्रिकाओं की प्रतिष्ठा खत्म हो जाएगी और फर्जी जर्नल्स का बाजार गर्म होगा। छात्रों का मानना है कि यह कदम भारतीय शिक्षा और शोध प्रणाली के लिए एक बड़ा झटका है। एनएसयूआई के नेताओं ने सरकार से मांग है कि इस ड्राफ्ट को वापस लिया जाए, क्योंकि यह न केवल छात्रों के लिए हानिकारक है, बल्कि यह भारतीय संविधान के मूल्यों और प्रावधानों का उल्लंघन भी है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने इस ड्राफ्ट को वापस नहीं लिया, तो छात्रों का विरोध और तेज होगा।

इस दाैरान एनएसयू.आई प्रदेश महासचिव ज्योति राव, प्रदेश सचिव शेक अयाज़, मेहेंद्र कर्मा विश्वाविद्यालय अध्यक्ष पंकज केवट, महाविद्यालय अध्यक्ष हंशु नाग, जिला उपाध्यक्ष ओमकार यादव, जिला सचिव कुणाल पांडे, यशराज कटौटे भुनेश्वर कश्यप एवं अन्य छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे