उत्तर प्रदेश में ग्रामीण मजदूरों के लिए नई बेरोजगारी भत्ता योजना का आगाज़
नई योजना का उद्देश्य
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में ग्रामीण श्रमिकों और किसानों के लिए एक नई योजना जल्द ही लागू होने वाली है, जो उन्हें काम की कमी के समय आर्थिक सहायता प्रदान करेगी। राज्य सरकार केंद्र की विकसित भारत-जी रामजी (VB-GRAMJI) योजना को लागू करने की प्रक्रिया में है। इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों को रोजगार के साथ-साथ कुछ विशेष परिस्थितियों में बेरोजगारी भत्ते का लाभ भी मिलेगा। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण परिवारों की आय को स्थिर रखने में मदद मिलेगी।
योजना की मंजूरी की प्रक्रिया
ग्राम्य विकास विभाग ने इस योजना का प्रारूप तैयार कर लिया है और इसे जल्द ही राज्य मंत्रिमंडल के समक्ष मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, सरकार इस योजना को जुलाई से लागू करने की दिशा में तेजी से कार्य कर रही है। मंजूरी मिलने के बाद, राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में इसके नियम और प्रावधान लागू किए जाएंगे।
मनरेगा के स्थान पर नई योजना
केंद्र सरकार ने ग्रामीण रोजगार से संबंधित व्यवस्था में बदलाव करते हुए विकसित भारत-जी रामजी योजना को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके अनुसार, राज्यों को भी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। उत्तर प्रदेश सरकार ने योजना के प्रारूप में मनरेगा से जुड़े श्रमिकों को शामिल करने की व्यवस्था की है, साथ ही नए श्रमिकों को भी जोड़ा जाएगा जो किसी सरकारी रोजगार योजना से नहीं जुड़े हैं। सरकार का उद्देश्य अधिक से अधिक ग्रामीण परिवारों को रोजगार सुरक्षा प्रदान करना है।
खेती के ऑफ-सीजन में सहायता
ग्रामीण क्षेत्रों में कई श्रमिक खेती पर निर्भर होते हैं। बुवाई और कटाई के समय उन्हें पर्याप्त काम मिलता है, लेकिन इन सीज़नों के बीच रोजगार के अवसर कम हो जाते हैं। नई योजना में ऐसे समय को ध्यान में रखते हुए व्यवस्था बनाई गई है। प्रस्तावित नियमों के अनुसार, खेती के व्यस्त मौसम के अलावा जब श्रमिकों के पास काम नहीं होगा, तब उन्हें बेरोजगारी भत्ते का लाभ दिया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि काम की कमी के कारण श्रमिकों और उनके परिवारों की आय पर अधिक प्रभाव न पड़े।
125 दिनों की रोजगार गारंटी
योजना की एक प्रमुख विशेषता रोजगार की अवधि में वृद्धि है। पहले ग्रामीण परिवारों को 100 दिनों के रोजगार की गारंटी मिलती थी, जिसे अब बढ़ाकर 125 दिन किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश में पात्र ग्रामीण परिवारों को साल में 125 दिनों तक रोजगार उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। इससे श्रमिकों को अधिक समय तक आय का स्रोत मिलेगा। सरकार का मानना है कि रोजगार के अतिरिक्त दिनों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
मजदूरी भुगतान की प्रक्रिया
योजना में मजदूरी भुगतान की प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल बनाने का प्रावधान है। इससे भुगतान में पारदर्शिता बढ़ेगी और श्रमिकों को सीधे उनके खातों में राशि प्राप्त होगी। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, मजदूरी का भुगतान हर सप्ताह किया जा सकता है। यदि किसी कारणवश साप्ताहिक भुगतान संभव नहीं होता है, तो काम पूरा होने या मजदूरी तय होने की तारीख से अधिकतम 15 दिनों के भीतर भुगतान करना होगा। इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि श्रमिकों को अपनी मेहनत की कमाई के लिए लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े।
