हरियाणा में मौसम के बदलाव: किसानों के लिए महत्वपूर्ण सलाह
हरियाणा में मौसम में बदलाव
चंडीगढ़। हरियाणा के मौसम में हाल के दिनों में महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। सुबह के समय घने कोहरे और रात की ठंड ने न केवल आम जनजीवन को प्रभावित किया है, बल्कि कृषि गतिविधियों पर भी असर डाला है। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए चौधरी चरणसिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (HAU) के वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए एक विशेष सलाह जारी की है। उनका कहना है कि गेहूं और सरसों जैसी प्रमुख फसलों को इस मौसम में विशेष देखभाल की आवश्यकता है ताकि उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े।
फसलों के लिए सिंचाई और रोगों से बचाव के उपाय
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, अत्यधिक ठंड और पाला फसलों के लिए हानिकारक हो सकता है। इसलिए, किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपनी फसलों में हल्की सिंचाई करें। इससे नमी बनी रहती है और पाले का प्रभाव कम होता है।
सरसों की देखभाल: कोहरे और अधिक नमी के कारण सरसों में सफेद रतुआ और अल्टरनेरिया जैसे रोगों का खतरा बढ़ जाता है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे नियमित रूप से खेत का निरीक्षण करें और आवश्यकता पड़ने पर उचित कीटनाशकों का छिड़काव करें।
गेहूं और जौ: इन फसलों में पाले से बचाव के लिए मिट्टी में नमी बनाए रखना आवश्यक है। इसके लिए हल्की सिंचाई का सहारा लेना सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है।
पशुओं का प्रबंधन: ठंड का असर पशुओं पर भी पड़ता है। वैज्ञानिकों ने सुझाव दिया है कि पशुओं को खुले आसमान के नीचे न बांधें और उन्हें पीने के लिए हल्का गर्म पानी दें।
हरियाणा के मौसम का हाल और विजिबिलिटी का संकट
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, कैथल, करनाल, पानीपत, हिसार और भिवानी सहित दक्षिण हरियाणा के कई क्षेत्रों में घना कोहरा छाया रहा। कई स्थानों पर विजिबिलिटी (दृश्यता) काफी कम हो गई, जिससे सड़कों पर वाहनों की गति धीमी हो गई। हालांकि, दिन में धूप खिलने से तापमान में थोड़ी वृद्धि हुई है, लेकिन रातें अभी भी काफी ठंडी बनी हुई हैं।
अगले 24 घंटों का पूर्वानुमान और तापमान में बदलाव
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, अगले 24 घंटों तक कोहरे का प्रभाव बना रहेगा। पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के कमजोर होने के बाद उत्तर-पश्चिमी ठंडी हवाएं मैदानी इलाकों में सक्रिय हो गई हैं, जिससे रात के तापमान में और गिरावट आने की संभावना है।
अच्छी खबर यह है कि 10 फरवरी के बाद दिन के तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी शुरू होगी। फिलहाल बारिश की कोई संभावना नहीं है, जिससे कोहरा कुछ समय तक और परेशान कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह का मौसम गेहूं की फसल के लिए दाना बनने की प्रक्रिया में सहायक हो सकता है, बशर्ते रोगों से बचाव किया जाए।
सरसों की फसल में लगने वाले रोग
सरसों की फसल को रोगों से बचाना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि कोहरे और नमी के कारण होने वाले हमले पूरी पैदावार को 30% से 50% तक कम कर सकते हैं। चौधरी चरणसिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (HAU) के विशेषज्ञों के अनुसार, सरसों में मुख्य रूप से दो बीमारियाँ सबसे अधिक नुकसान पहुँचाती हैं।
नीचे उनकी पहचान और बचाव के लिए सटीक कीटनाशकों की जानकारी दी गई है:
1. सफेद रतुआ (White Rust)
पहचान: इस रोग में सरसों की पत्तियों की निचली सतह पर सफेद रंग के उभरे हुए धब्बे दिखाई देने लगते हैं। बाद में यह फूल और तने तक पहुँच जाता है, जिससे फलियाँ नहीं बन पातीं।
उपचार: यदि संक्रमण दिखाई दे, तो मेटालैक्सिल 8% + मैनकोजेब 64% (Metalaxyl + Mancozeb) के मिश्रण का 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।
2. अल्टरनेरिया झुलसा (Alternaria Blight)
पहचान: पत्तियों पर भूरे और काले रंग के गोल छल्ले (जैसे निशाने के बोर्ड पर होते हैं) बन जाते हैं। ज्यादा कोहरे में यह रोग बहुत तेजी से फैलता है।
उपचार: इसके बचाव के लिए मैनकोजेब (Mancozeb) 75% WP की 2 ग्राम मात्रा या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड (Copper Oxychloride) की 3 ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें।
कीटनाशकों के इस्तेमाल के समय सावधानियाँ
कृषि वैज्ञानिकों ने कुछ विशेष सावधानियां बरतने की सलाह दी है ताकि दवाई का असर पूरा हो:
साफ मौसम में स्प्रे: जब पत्तियों पर ओस न हो और धूप खिली हो, तभी छिड़काव करें। अगर स्प्रे के तुरंत बाद बारिश हो जाए, तो दोबारा छिड़काव करना पड़ सकता है।
पानी की सही मात्रा: एक एकड़ के लिए कम से कम 150 से 200 लीटर पानी का इस्तेमाल करें ताकि पूरी फसल अच्छे से भीग जाए।
दोबारा छिड़काव: यदि रोग का प्रभाव ज्यादा है, तो 15 दिन के अंतराल पर दूसरा छिड़काव ज़रूर करें।
पाले (Frost) से बचाने का घरेलू नुस्खा
दवाइयों के अलावा, यदि पाला पड़ने की संभावना हो, तो शाम के समय खेत की उत्तर-पश्चिमी दिशा में धुआं करना भी काफी कारगर साबित होता है। इससे खेत के पास का तापमान 1 से 2 डिग्री तक बढ़ जाता है और फसल बच जाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न: क्या सरसों में फूल आने पर स्प्रे करना सुरक्षित है?
उत्तर: हाँ, लेकिन सावधानी से। सुबह बहुत जल्दी स्प्रे न करें क्योंकि उस समय मधुमक्खियाँ परागण (Pollination) के लिए आती हैं। दोपहर के समय स्प्रे करना सबसे अच्छा रहता है।
प्रश्न: क्या सफेद रतुआ मिट्टी से फैलता है?
उत्तर: यह मुख्य रूप से हवा और संक्रमित बीजों से फैलता है। इसलिए अगले साल के लिए बीज हमेशा स्वस्थ फसल से ही चुनें।
प्रश्न: हल्की सिंचाई का सबसे सही समय क्या है?
उत्तर: शाम के समय सिंचाई करना सबसे बेहतर है क्योंकि यह रात भर ज़मीन का तापमान गिरने नहीं देती।
