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गुरिंदरवीर सिंह ने फेडरेशन कप में बनाया नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड

गुरिंदरवीर सिंह ने रांची के बिरसा मुंडा एथलेटिक्स स्टेडियम में फेडरेशन कप के फाइनल में 100 मीटर दौड़ में नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया। उनकी इस उपलब्धि ने भारतीय स्प्रिंटिंग को नई पहचान दी है। अनिमेष कुजूर के साथ उनकी प्रतिस्पर्धा ने मुकाबले को और भी रोमांचक बना दिया। जानें कैसे उन्होंने कठिनाइयों को पार करते हुए इस मुकाम को हासिल किया।
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गुरिंदरवीर सिंह ने फेडरेशन कप में बनाया नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड

भारतीय एथलेटिक्स में नया अध्याय


शनिवार की शाम रांची के बिरसा मुंडा एथलेटिक्स स्टेडियम में भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना घटी। फेडरेशन कप के फाइनल में गुरिंदरवीर सिंह ने अपनी दौड़ से पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया। उनकी इस उपलब्धि ने भारतीय स्प्रिंटिंग को एक नई पहचान दी और उन्होंने खुद को देश का सबसे तेज धावक साबित किया। अनिमेष कुजूर के साथ उनकी प्रतिस्पर्धा ने इस मुकाबले को और भी रोमांचक बना दिया।


रिकॉर्ड की प्रतिस्पर्धा ने बढ़ाया उत्साह

फेडरेशन कप के सेमीफाइनल से ही माहौल गर्म था। पहले गुरिंदरवीर ने शानदार समय निकालकर राष्ट्रीय रिकॉर्ड अपने नाम किया, लेकिन कुछ ही मिनटों बाद अनिमेष कुजूर ने उससे बेहतर प्रदर्शन कर रिकॉर्ड वापस हासिल कर लिया। इससे फाइनल के प्रति उत्साह और बढ़ गया। स्टेडियम में दर्शकों को पता था कि अगले दिन कुछ बड़ा होने वाला है। फाइनल में दोनों धावक अलग अंदाज में ट्रैक पर उतरे।


गुरिंदरवीर की गति बनी भारत की पहचान

फाइनल में गुरिंदरवीर ने शुरुआत से ही तेज गति पकड़ी और अंत तक बढ़त बनाए रखी। पंजाब के 25 वर्षीय स्प्रिंटर ने पुरुषों की 100 मीटर दौड़ 10.09 सेकंड में पूरी की और नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया। अनिमेष ने भी शानदार वापसी की कोशिश की, लेकिन गुरिंदरवीर को पकड़ना मुश्किल साबित हुआ। उन्होंने रिकॉर्ड समय के साथ फिनिश लाइन पार की और जीत के बाद जोरदार जश्न मनाया। यह पहली बार है जब किसी भारतीय ने 100 मीटर दौड़ 10.10 सेकंड से कम समय में पूरी की है। दौड़ खत्म होते ही उन्होंने अपना बिब नंबर ट्रैक पर फेंक दिया और दहाड़ लगाई। बाद में उसी बिब पर लिखा संदेश कैमरों के सामने दिखाया गया, जिसमें लिखा था कि उनका काम अभी खत्म नहीं हुआ है। यह सिर्फ जीत नहीं, बल्कि एक बड़े लक्ष्य की शुरुआत थी।


कठिनाइयों से उबरकर हासिल की सफलता

गुरिंदरवीर का सफर आसान नहीं रहा। पेट की गंभीर समस्या के कारण उन्हें लंबे समय तक ट्रैक से दूर रहना पड़ा। इस दौरान उन्हें मानसिक और शारीरिक दोनों चुनौतियों का सामना करना पड़ा। बाद में सही ट्रेनिंग, बेहतर सुविधाएं और मजबूत सपोर्ट सिस्टम मिलने के बाद उनकी वापसी हुई। रिलायंस फाउंडेशन के साथ ट्रेनिंग करते हुए उन्होंने अपनी फिटनेस और तकनीक पर काफी काम किया। गुरिंदरवीर का कहना है कि उन्हें हमेशा अपनी स्पीड पर भरोसा था, लेकिन अब जाकर उन्हें सही दिशा और माहौल मिला है।