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ईरान में विरोध प्रदर्शनों का जारी संकट: खामेनेई की चेतावनी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं

ईरान में पिछले दो हफ्तों से चल रहे विरोध प्रदर्शनों ने सरकार को चुनौती दी है। 72 लोगों की मौत और 2,300 से अधिक गिरफ्तारियों के बावजूद लोग सड़कों पर उतर रहे हैं। सर्वोच्च नेता खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों को 'ईश्वर का दुश्मन' करार दिया है। अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया है। जानें इस संकट के पीछे के कारण और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं।
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ईरान में विरोध प्रदर्शनों का जारी संकट: खामेनेई की चेतावनी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं

विरोध प्रदर्शनों की स्थिति


ईरान में पिछले दो हफ्तों से चल रहे विरोध प्रदर्शनों में कोई कमी नहीं आ रही है। रविवार को इन प्रदर्शनों ने 14 दिन पूरे कर लिए, लेकिन सरकार की कड़ी कार्रवाई के बावजूद लोग सड़कों पर उतरते रहे हैं। इंटरनेट और फोन सेवाओं के ठप होने से सही जानकारी प्राप्त करना मुश्किल हो गया है।


मानवाधिकार स्थिति

मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, कम से कम 72 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और 2,300 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने चेतावनी दी है कि प्रदर्शनकारियों को 'ईश्वर का दुश्मन' मानकर उनकी सजा मौत हो सकती है।


खामेनेई का आरोप

खामेनेई ने विदेशों पर लगाया आरोप


ईरान के अटॉर्नी जनरल मोहम्मद मोवाहेदी आजाद ने सरकारी टीवी पर कहा कि विरोध में शामिल लोगों को 'ईश्वर के शत्रु' के रूप में देखा जाएगा। यह आरोप मौत की सजा से जुड़ा हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि दंगाइयों की मदद करने वालों को भी सजा मिलेगी।


मौतों और गिरफ्तारियों का सिलसिला

मौतों और गिरफ्तारियों का सिलसिला


मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के अनुसार, प्रदर्शनों में अब तक 72 मौतें हो चुकी हैं। सुरक्षा बलों ने गोलियां चलाईं और कई स्थानों पर आगजनी की घटनाएं हुईं। सरकारी रिपोर्टों में सुरक्षा अधिकारियों की मौतों का भी उल्लेख है।


अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया है। उन्होंने कहा, "ईरान आजादी की ओर बढ़ रहा है, अमेरिका मदद के लिए तैयार है।" अमेरिकी विदेश विभाग ने चेतावनी दी है कि ट्रंप के वादों को हल्के में न लिया जाए।


प्रदर्शनों का कारण

प्रदर्शनों का कारण


प्रदर्शन 28 दिसंबर को रियाल मुद्रा की गिरावट के खिलाफ शुरू हुए थे, लेकिन जल्दी ही ये सरकार विरोधी हो गए। ये आर्थिक प्रतिबंधों का परिणाम हैं। सरकारी टीवी पर सरकार समर्थक रैलियों का प्रसारण किया जा रहा है, लेकिन वीडियो से विरोध की वास्तविकता स्पष्ट है।