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क्या अमेरिका और रूस के बीच परमाणु समझौते का अंत वैश्विक सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है?

अमेरिका और रूस के बीच परमाणु हथियारों को सीमित करने वाला अंतिम समझौता समाप्त होने के कगार पर है, जिससे वैश्विक सुरक्षा को खतरा उत्पन्न हो सकता है। यूक्रेन युद्ध के चलते बढ़ते तनाव के बीच, दोनों देशों के नेताओं ने इस समझौते को आगे बढ़ाने में रुचि नहीं दिखाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल इन देशों के बीच तनाव बढ़ेगा, बल्कि अन्य देशों में भी नई हथियार होड़ शुरू हो सकती है। जानें इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर विस्तृत जानकारी और इसके संभावित परिणाम।
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क्या अमेरिका और रूस के बीच परमाणु समझौते का अंत वैश्विक सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है?

अमेरिका-रूस परमाणु संधि का अंत


अमेरिका और रूस के बीच परमाणु हथियारों को नियंत्रित करने वाला अंतिम समझौता अब समाप्ति की ओर बढ़ रहा है। गुरुवार को इस संधि की अवधि खत्म होने के साथ ही दोनों देशों पर लागू परमाणु हथियारों की तैनाती से संबंधित सभी प्रतिबंध समाप्त हो जाएंगे। इससे दुनिया में एक बार फिर अनियंत्रित परमाणु हथियारों की दौड़ का खतरा बढ़ गया है। यह चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि यूक्रेन युद्ध के चलते तनाव में वृद्धि हुई है, और न ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और न ही रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस समझौते को आगे बढ़ाने में रुचि दिखा रहे हैं।


परमाणु हथियारों का बड़ा हिस्सा अमेरिका और रूस के पास

यह संधि पिछले तीन दशकों से अमेरिका और रूस के बीच हथियार नियंत्रण सहयोग का आधार रही है, जिसने शीत युद्ध के बाद परमाणु टकराव के खतरे को काफी हद तक कम किया। वर्तमान में, दुनिया के कुल परमाणु हथियारों का लगभग 87 प्रतिशत हिस्सा इन दोनों देशों के पास है। इस संधि का समाप्त होना वैश्विक सुरक्षा के लिए एक गंभीर झटका माना जा रहा है।


न्यू स्टार्ट संधि का महत्व

2010 में, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और रूस के तत्कालीन राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने न्यू स्टार्ट संधि पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें दोनों देशों ने अपने परमाणु हथियारों की संख्या 1,550 तक सीमित रखने पर सहमति जताई थी। इसके अलावा, मिसाइल स्थलों का निरीक्षण, सूचनाओं का आदान-प्रदान और सत्यापन की व्यवस्था भी शामिल थी। 2021 में इसे पांच साल के लिए बढ़ाया गया था, लेकिन अब इसका भविष्य अनिश्चितता में है।


संयुक्त राष्ट्र महासचिव की चेतावनी

इस स्थिति ने संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक समुदाय को चिंतित कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने चेतावनी दी है कि दशकों बाद पहली बार ऐसा समय आ रहा है जब दो सबसे बड़ी परमाणु शक्तियों पर कोई बाध्यकारी सीमा नहीं होगी। उन्होंने इसे वैश्विक शांति के लिए अत्यंत खतरनाक बताया।


विशेषज्ञों की चिंता

विशेषज्ञों का मानना है कि इसका प्रभाव 1970 की परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर भी पड़ेगा, जिसके तहत गैर-परमाणु देशों ने हथियार न बनाने का वादा किया है। यदि अमेरिका और रूस अपने शस्त्रागार को बढ़ाते हैं, तो अन्य देश भी सवाल उठा सकते हैं और नई हथियार होड़ शुरू हो सकती है।


भविष्य की अनिश्चितता

वर्तमान में, रूस और अमेरिका दोनों अपने परमाणु हथियारों का आधुनिकीकरण कर रहे हैं। न्यू स्टार्ट संधि का अंत एक ऐसे दौर की शुरुआत का संकेत देता है, जहां वैश्विक राजनीति में अस्थिरता और तनाव नई पहचान बन सकते हैं।