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अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की ओर बढ़ते कदम: होर्मुज जलडमरूमध्य पर नई उम्मीदें

अमेरिका और ईरान के बीच एक संभावित शांति समझौते का खाका तैयार हो चुका है, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य से समुद्री यातायात को बहाल करने की योजना है। इस समझौते के तहत नाकेबंदी को हटाने और ईरानी फंड को रिलीज करने का प्रस्ताव है। हालांकि, परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दे अभी भी सुलझाने बाकी हैं। अमेरिका के विदेश मंत्री ने वार्ता में प्रगति के संकेत दिए हैं, जिससे वैश्विक ईंधन और खाद्य सुरक्षा को पुनर्स्थापित करने की उम्मीदें बढ़ी हैं।
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अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की ओर बढ़ते कदम: होर्मुज जलडमरूमध्य पर नई उम्मीदें

संभावित शांति समझौते का खाका तैयार


नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच एक महत्वपूर्ण शांति समझौते का प्रारूप लगभग तैयार हो चुका है। वाशिंगटन और तेहरान के बीच चल रही वार्ताओं में यह प्रस्ताव रखा गया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से समुद्री जहाजों का आवागमन अगले 30 दिनों में युद्ध-पूर्व स्तर पर लौट आएगा।


नाकेबंदी हटाने की योजना

नाकेबंदी को हटाया जाएगा


इस संभावित समझौते के पहले चरण में होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास की नौसैनिक नाकेबंदी को पूरी तरह समाप्त किया जाएगा। इसके साथ ही, विदेशों में फ्रीज किए गए ईरानी फंड का एक हिस्सा भी तुरंत रिलीज किया जाएगा।


परमाणु मुद्दे पर बातचीत

60 दिनों की समय-सीमा


हालांकि, परमाणु कार्यक्रम से संबंधित मुद्दे अभी तक पूरी तरह से सुलझ नहीं पाए हैं। ईरान ने अपनी परमाणु गतिविधियों को सीमित करने के लिए कोई नया आश्वासन नहीं दिया है। मसौदे के अनुसार, समुद्री यातायात को बहाल करने के लिए 30 दिनों का समय निर्धारित किया गया है।


भविष्य की वार्ताओं के लिए समय-सीमा

समय-सीमा बनाई गई


परमाणु चिंताओं पर आगे की बातचीत के लिए 60 दिनों की अलग समय-सीमा निर्धारित की गई है। ईरान की टीम अपने देश की गरिमा और संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेगी। यदि यह समझौता अंतिम रूप लेता है, तो अमेरिका और उसके सहयोगी देशों द्वारा ईरान पर हमले की गारंटी दी जाएगी, जिससे वैश्विक ईंधन और खाद्य सुरक्षा को फिर से स्थापित किया जा सकेगा।


तीन महीने के गतिरोध के बाद सफलता

तीन महीने के गतिरोध के बाद बड़ी सफलता


यह कूटनीतिक सफलता ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच फरवरी में हुए भीषण सैन्य संघर्ष के लगभग तीन महीने बाद प्राप्त हुई है। इस युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से वैश्विक समुद्री व्यापार में रुकावट आई थी। युद्ध से पहले, इस जलमार्ग से प्रतिदिन लगभग 125 से 140 जहाज गुजरते थे।


तेल की कीमतों में वृद्धि

तेल की कीमतों में उछाल


तनाव बढ़ने के बाद, ईरान ने इस मार्ग पर अपने नियंत्रण को कड़ा कर दिया था, जिसके परिणामस्वरूप अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों से जुड़े जहाजों पर नाकेबंदी लगा दी। इससे यातायात में भारी कमी आई और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में 40 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई, जिसने दुनिया भर में महंगाई को बढ़ा दिया।


अमेरिकी नेतृत्व के सकारात्मक संकेत

अमेरिकी नेतृत्व ने दिए सकारात्मक संकेत


भारत के दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने नई दिल्ली में भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ एक संयुक्त प्रेस वार्ता में संकेत दिया कि वार्ता अब एक निर्णायक मोड़ पर है। रुबियो ने कहा कि कुछ प्रगति हुई है। ट्रम्प ने लिखा कि वाशिंगटन और तेहरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए शांति व्यवस्था के ढांचे पर काफी हद तक बातचीत पूरी कर ली है।