क्या ईरान पर हमले की योजना को रोकने में ट्रंप का फोन कॉल था निर्णायक?
नई दिल्ली में तनाव का नया खुलासा
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि उन्होंने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को ईरान पर संभावित हमले को रोकने के लिए सीधे फोन किया। ट्रंप के अनुसार, उन्होंने नेतन्याहू को स्पष्ट रूप से चेतावनी दी कि अगर स्थिति और बिगड़ती है, तो इजरायल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ सकता है।
इजरायल की सैन्य योजना का खुलासा
अमेरिकी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, इजरायल अप्रैल के बाद से ईरान के खिलाफ एक बड़े सैन्य अभियान की तैयारी कर रहा था। इस योजना में कई महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाने का इरादा था। जब अमेरिका को इस योजना की जानकारी मिली, तो राष्ट्रपति ट्रंप ने नेतन्याहू से संपर्क किया और संयम बरतने की सलाह दी।
फोन कॉल के बाद की रणनीति में बदलाव
रिपोर्टों के अनुसार, फोन पर दोनों नेताओं के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेद भी थे। लेकिन बातचीत के अंत में एक समझौता हुआ, जिसके तहत यदि ईरान की ओर से कोई नई सैन्य कार्रवाई नहीं होती है, तो इजरायल अपने हमले को रोक देगा। नेतन्याहू ने अपने वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को हमलों को रद्द करने का निर्देश दिया, जिससे क्षेत्र में तनाव कुछ हद तक कम हुआ।
इजरायल-ईरान के बीच सैन्य कार्रवाई में कमी
हालिया घटनाक्रम के बाद, दोनों देशों ने संकेत दिए हैं कि फिलहाल प्रत्यक्ष सैन्य टकराव को टाल दिया गया है। हालांकि, हाल के हमलों ने पश्चिम एशिया को एक बार फिर बड़े संघर्ष के कगार पर ला खड़ा किया था। ईरान की ओर से सैन्य कार्रवाई रोकने की घोषणा के बाद, नेतन्याहू ने कहा कि स्थिति नियंत्रण में है और तनाव कम हुआ है।
तनाव का कारण क्या था?
रविवार को, ईरान ने लेबनान में हिज्बुल्लाह के खिलाफ इजरायली सैन्य कार्रवाई के विरोध में मिसाइलें दागी थीं। इसके जवाब में इजरायल ने भी सैन्य कार्रवाई की। अमेरिका ने इस टकराव को बढ़ने से रोकने की कोशिश की, लेकिन स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। इसके बाद ईरान ने मिसाइलों का एक और दौर शुरू किया, जिसके बाद युद्धविराम की घोषणा की गई।
दोनों देशों की चेतावनी
हालांकि स्थिति फिलहाल शांत है, लेकिन दोनों पक्षों ने भविष्य को लेकर कड़े बयान दिए हैं। तेहरान ने स्पष्ट किया है कि यदि लेबनान में हमले जारी रहते हैं, तो वह फिर से कार्रवाई कर सकता है। नेतन्याहू ने भी चेतावनी दी कि अगर इजरायल पर कोई हमला हुआ, तो उसका जवाब पूरी ताकत से दिया जाएगा।
अमेरिका और इजरायल के बीच मतभेद
विश्लेषकों का मानना है कि हाल की घटनाएं अमेरिका और इजरायल के बीच रणनीतिक सोच में बढ़ते अंतर को दर्शाती हैं। दोनों देश लंबे समय से सहयोगी रहे हैं, लेकिन वर्तमान में उनके राजनीतिक और सुरक्षा हित पूरी तरह से मेल नहीं खा रहे हैं। ट्रंप की प्राथमिकता क्षेत्र में युद्ध को सीमित करना है, जबकि नेतन्याहू घरेलू राजनीतिक परिस्थितियों के कारण सुरक्षा मुद्दों पर सख्त रुख अपनाना चाहते हैं।
