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डोनाल्ड ट्रंप का ईरान डील पर बड़ा दावा: समझौता लगभग तय

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ एक महत्वपूर्ण डील के बारे में जानकारी दी है, जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने का प्रस्ताव भी शामिल है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान अमेरिका को एनरिच्ड यूरेनियम सौंपने के लिए तैयार है। हालांकि, ईरान ने चार शर्तें रखी हैं, जिनमें अपने बंदरगाहों की नाकेबंदी खत्म करने की मांग शामिल है। इस बीच, इजरायल की चिंताएं भी बढ़ रही हैं, क्योंकि ट्रंप और नेतन्याहू के बीच इस डील को लेकर मतभेद हैं। जानें इस डील के संभावित प्रभाव और इजरायल की प्रतिक्रिया क्या हो सकती है।
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डोनाल्ड ट्रंप का ईरान डील पर बड़ा दावा: समझौता लगभग तय

ट्रंप का ईरान डील पर बयान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि ईरान के साथ एक समझौता लगभग अंतिम रूप में है, और वह जल्द ही इस बारे में जानकारी साझा करेंगे। ट्रंप ने बताया कि इस डील में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने का प्रावधान भी शामिल है, हालांकि उन्होंने इस विषय पर अधिक जानकारी नहीं दी।


न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट

इस बीच, न्यूयॉर्क टाइम्स ने दो अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया है कि ईरान अमेरिका को अपना एनरिच्ड यूरेनियम सौंपने के लिए तैयार है। ट्रंप के बयान और मीडिया की रिपोर्टों से यह संकेत मिल रहा है कि डील की दिशा में प्रगति हो रही है, लेकिन कई मुद्दों पर स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है। इस दावे पर ईरान और इजरायल की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।


ईरान की चार शर्तें

ईरान ने रखी हैं ये चार शर्तें

सूत्रों के अनुसार, ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत में सीजफायर को 60 दिनों के लिए बढ़ा दिया गया है। इस अवधि में दोनों पक्ष अपनी शर्तों पर सहमति बनाने का प्रयास करेंगे। ट्रंप ने कहा कि इस डील पर उनकी सऊदी अरब, यूएई और कतर सहित नौ देशों के साथ चर्चा हुई है। पाकिस्तान और कतर इस बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। ईरान ने अमेरिका के सामने चार प्रमुख शर्तें रखी हैं, जिनमें अपने बंदरगाहों की नाकेबंदी खत्म करने, जब्त संपत्तियों की वापसी, युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई, और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अस्थायी रूप से खोलने की मांग शामिल है।


इजरायल की चिंताएं

क्या डील पर ट्रंप ने इजरायल को छोड़ दिया है?

इस समझौते के प्रारंभिक ड्राफ्ट में ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन प्रोग्राम पर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया गया है, जो इजरायल के लिए एक बड़ा खतरा है। यह सवाल उठ रहा है कि ट्रंप इस बातचीत में इजरायल को शामिल क्यों नहीं कर रहे हैं, जबकि 28 फरवरी को ईरान पर हमला अमेरिका और इजरायल ने मिलकर किया था। इसके अलावा, इस डील में इजरायल और मध्य पूर्व की सुरक्षा चिंताओं को दूर करने के उपायों पर भी कोई स्पष्टता नहीं है।


इजरायल का संभावित रुख

डील पर इजरायल का क्या रुख होगा?

इजरायल का इस डील पर रुख देखना महत्वपूर्ण होगा, खासकर जब उनकी सुरक्षा चिंताओं का समाधान नहीं किया गया है। इस बीच, अमेरिका के वरिष्ठ राजनेता लिंडसे ग्राहम ने ईरान के साथ होने वाली डील को लेकर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि इस डील से ईरान को मजबूत होने का मौका मिलेगा, जिससे वह अपने प्रॉक्सी संगठनों के माध्यम से इजरायल और खाड़ी देशों के लिए नया संकट पैदा कर सकता है।


ट्रंप और नेतन्याहू के बीच मतभेद

एक पेज पर नहीं हैं ट्रंप और नेतन्याहू?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के साथ आगे कैसे निपटा जाए, इस पर ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच स्पष्ट मतभेद हैं। हालांकि, ट्रंप ने कहा कि नेतन्याहू 'वही करेंगे जो मैं उनसे करवाना चाहता हूं' और वे 'बहुत अच्छे इंसान' हैं। ट्रंप ने फिर से कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच एक बड़ा समझौता लगभग तय हो गया है, जिससे यह संभावना बन रही है कि ईरान युद्ध शायद दोबारा शुरू नहीं होगा।