ब्रिक्स बैठक में ईरान और यूएई के बीच तीखी बहस, भारत की अध्यक्षता में तनाव बढ़ा
भारत इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है, और हाल ही में आयोजित विदेश मंत्रियों की बैठक में ईरान और यूएई के बीच तीखी बहस हुई। दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप ने बैठक का माहौल तनावपूर्ण बना दिया। ईरान ने यूएई पर गंभीर आरोप लगाए, जबकि यूएई ने ईरान को अस्थिरता का कारण बताया। इस विवाद का वैश्विक राजनीति और तेल बाजार पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह देखने वाली बात होगी।
| May 15, 2026, 12:52 IST
ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में तनावपूर्ण माहौल
इस वर्ष भारत ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है, और इस दौरान विदेश मंत्रियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई है। इस बैठक में सभी सदस्य देशों के विदेश मंत्री भारत पहुंचे हैं। हालाँकि, इस बैठक में एक अप्रत्याशित दृश्य देखने को मिला, जब ईरान और यूएई के प्रतिनिधियों के बीच तीखी बहस छिड़ गई। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और हमलों के कारण दोनों देशों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि बैठक का माहौल पूरी तरह से बदल गया। दरअसल, यूएई ने ईरान पर आरोप लगाया कि वह पड़ोसी देशों और ऊर्जा स्थलों पर हमले कर रहा है। यूएई के प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि ईरान क्षेत्र में अस्थिरता पैदा कर रहा है और उसके कदम पूरे गल्फ क्षेत्र की सुरक्षा के लिए खतरा बन रहे हैं। इसके जवाब में, ईरान ने भी आक्रामक तरीके से प्रतिक्रिया दी।
ईरान का जवाब और आरोप
भारत में स्थित ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक विस्तृत पोस्ट साझा किया, जिसमें ईरान के उप विदेश मंत्री डॉक्टर काजिम गरीबादी के बयान को साझा किया गया। उन्होंने यूएई पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यूएई अमेरिका और उसके सहयोगियों की मदद कर रहा है और उसकी भूमि का उपयोग ईरान के खिलाफ सैन्य कार्यों के लिए किया जा रहा है। ईरान ने यह भी कहा कि यूएई केवल सहयोगी नहीं है, बल्कि हमले में शामिल देश भी है। ईरान के प्रतिनिधि ने कहा कि जब उनके देश पर हमले हो रहे थे, तब यूएई ने हमलावर देशों को सुविधाएं प्रदान कीं, जिसके कारण ईरान को जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी। ईरान ने यह भी दावा किया कि उसने यूएई में उन सभी ठिकानों को निशाना बनाया जहां अमेरिका की भूमिका थी।
आत्मरक्षा का अधिकार और चेतावनियाँ
ईरान ने अपनी कार्रवाई को आत्मरक्षा का अधिकार बताया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि ईरान ने कहा कि उसके पास यूएई से उड़ान भरने वाले सभी सैन्य विमानों का रिकॉर्ड मौजूद है। ईरान का दावा है कि उसने इस मामले में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को 120 से अधिक आधिकारिक दस्तावेज और 500 पन्नों का सबूत भी सौंपा है। ईरान ने यह भी कहा कि हमले शुरू होने से पहले ही यूएई और अन्य खाड़ी देशों को चेतावनी दी गई थी कि यदि उनकी भूमि का उपयोग ईरान के खिलाफ किया गया, तो जवाबी कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में तनाव और वैश्विक प्रभाव
हालांकि, यूएई ने इन चेतावनियों को नजरअंदाज किया, ऐसा ईरान का कहना है। बैठक में दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप इस हद तक बढ़ गए कि ब्रिक्स देशों के लिए एक साझा बयान जारी करना मुश्किल हो गया। रिपोर्टों के अनुसार, रूस को भी बीच में आकर माहौल को संभालना पड़ा ताकि बैठक पूरी तरह से विवाद में न बदल जाए। वेस्ट एशिया में बढ़ता तनाव अब केवल एक क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक राजनीति, तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय गठबंधनों पर भी पड़ रहा है। भारत की मेज़बानी में हुई इस बैठक में इस प्रकार का टकराव एक गंभीर विषय हो सकता है। ईरान और यूएई दोनों ही भारत के साथ अच्छे संबंध रखते हैं, और भारत इस संघर्ष की शुरुआत से ही बातचीत की पैरवी करता आ रहा है। वर्तमान में, भारत के ब्रिक्स मंच पर दोनों देशों के बीच यह भिड़ंत देखने को मिली है।
